मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कब तक? कई दिनों से 108 एंबुलेंस सेवा बंद….

टाण्डा । आदिवासी अंचल में आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बाग-टांडा क्षेत्र में कई दिनों से 108 एंबुलेंस सेवा बंद होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में गंभीर मरीजों, गर्भवती महिलाओं और दुर्घटना में घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाने को लेकर चिंता बढ़ गई है।
मेंटेनेंस के बाद एक-दो दिन में शुरू होने की उम्मीद108 एंबुलेंस सेवा के डिस्ट्रिक्ट मैनेजर के अनुसार, मेंटेनेंस के लिए एंबुलेंस को भोपाल भेजना पड़ता है। उन्होंने अगले एक-दो दिन में सेवा बहाल होने की उम्मीद जताई है।
मेंटेनेंस के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं?-सबसे बड़ा सवाल यह है कि एंबुलेंस मेंटेनेंस के लिए भेजे जाने पर मरीजों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? आदिवासी अंचल के कई गांव अस्पतालों से दूर हैं। ऐसे में आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस की अनुपलब्धता मरीजों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।
अब स्वास्थ्य विभाग से सवाल है कि सेवा बंद रहने के दौरान मरीजों को आपातकालीन सुविधा कैसे उपलब्ध कराई जा रही है और भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी?
जनहित की मांग: बाग-टांडा क्षेत्र में 108 एंबुलेंस सेवा तत्काल बहाल की जाए। साथ ही, मेंटेनेंस के दौरान वैकल्पिक एंबुलेंस की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि आपातकाल में मरीजों को समय पर उपचार मिल सके। ग्रामीणों के अनुसार उनका कहना ये है की108 एम्बुलेंस नही होने से किराए के वाहन से मरीज को ले जाना पड़ता है। ज्ञात हो कि टाण्डा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर की भी कमी है। जिससे भी स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा है। अभी सिर्फ दो महिला डॉक्टर है। जिसमें डॉ. ऋषिका बिनोरिया व डॉ.शिवानी बेनल के भरोसे ही सरकारी हॉस्पिटल चल रहा है। पिछले दिनों डॉक्टर यत्न जैन की पदस्थापना के लिए ग्रामीणों द्वारा चक्काजाम भी किया गया था।
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