उज्जैन। अमृतनगर में 28 जून को दिनदहाड़े मकान में हुई लाखों की चोरी में मकान मालकीन का पोता ही चोर होना सामने आया। उसने साथियों के साथ ताला तोड़ा था। पूछताछ में उसके साथियों ने 1 मई को पार्षद के मकान में हुई चोरी का राज भी उगल दिया। दोनों वारदात में चोरी किये गये 6 लाख के आभूषण बरामद किये गये है।
पंवासा थाना क्षेत्र के अमृतनगर में रहने वाली शांताबाई पति मांगीलाल देवड़ा ने 28 जून को दिनदहाड़े मकान में हुई चोरी की शिकायत पुलिस को दर्ज कराई थी। अज्ञात बदमाश मकान का ताला तोड़कर 4.50 लाख के आभूषण चुराकर ले गये थे। थाना प्रभारी गमरसिंह मंडलोई ने दिनदहाड़े हुई चोरी का पता लगाने के लिये एएसआई संतोष राव, सीताराम भुरिया, सावित्री कटारा, आरक्षक अमरनाथ, पंकज पाटीदार, ब्रजेन्द्र भारती और योगेश की टीम गठित की। 10 दिनों बाद चोरी में शामिल शांताबाई देवड़ा के नाबालिग पोते को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने अपने नाबालिग साथी और विश्वकर्मा कालोनी में रहने वाले दोस्त मोनिया उर्फ मोनू पिता सुरेशसिंह पंवार के साथ विधायक नगर में रहने वाले कार्तिक पिता कन्हैयालाल बैंडवाल के साथ मिलकर चोरी करना कबूल कर लिया। पुलिस ने उसके साथियों की तलाश शुरू की और नाबालिग के साथ मोनिया उर्फ मोनू को हिरासत में ले लिया। कार्तिक फरार होना सामने आया। थाना प्रभारी मंडलोई ने बताया कि तीनों की निशानदेही पर 6 लाख के आभूषण बरामद किये गये है। दोनों नाबालिगों को बाल संप्रेक्षणगृह भेजा गया है। मोनिया उर्फ मोनू को रिमांड पर लेकर फरार साथी कार्तिक की तलाश शुरू की गई है।
अधिक आभूषणों से खुला दूसरी चोरी का राज
बताया जा रहा है कि दादी के मकान में चोरी करने वाले पोते और उसके साथियों से पुलिस ने 6 लाख कीमत के आभूषण बरामद किये। जबकि शांताबाई के मकान से 4.50 लाख के आभूषण चोरी हुये थे। डेढ़ लाख कीमत के आभूषण अधिक मिलने पर सख्ती से पूछताछ की गई तो तीनों ने 1 मई को दिनदहाड़े माधौपुरा में वार्ड क्रमांक 40 की भाजपा पार्षद जानीबाई राठौर के मकान में चोरी करना भी कबूल कर लिया। पार्षद के मकान से बदमाशों ने 50 हजार रूपये नगद और चांदी के आभूषण चोरी किये थे। उस वक्त पुलिस को एक कार की तलाश थी, लेकिन उसका पता नहीं चल पाया था।
ऐसे मिला नाबालिग पोते का सुराग
अमृतनगर में शांताबाई के मकान में हुई चोरी की वारदात के बाद पुलिस क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही थी। घटना से पहले शांताबाई के मकान से दूर उसका नाबालिग पोता दिखाई दिया था। लेकिन उस पर संदेह नहीं हुआ, पुलिस की पड़ताल में जानकारी मिली कि शांताबाई का पोता पूर्व में चोरी कर चुका है, लेकिन पकड़ने जाने पर उसके परिवार ने आभूषण और चोरी का सामान लौटा दिया था। जिसके चलते शिकायत दर्ज नहीं हुई थी। पुलिस को संदेह हुआ और उसे ही हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। कुछ घंटे में सच सामने आ गया और दोनों वारदातों का खुलासा हो गया।