आदिवासियों की 44 एकड़ जमीन पर इंडस्ट्री का कब्जा

किसान बोले- जिला प्रशासन ने नियमों को ताक पर रखकर कृषि भूमि को नजूल घोषित कर दिया

ब्रह्मास्त्र इंदौर

इंदौर जिला प्रशासन पर 29 आदिवासी किसानों की पुश्तैनी जमीन लैंड यूज नियमों को नजरअंदाज कर उद्योग को लीज पर देने का आरोप है।

किसानों का दावा है कि उनकी कृषि भूमि को गलत तरीके से नजूल भूमि घोषित कर दिया गया, जिससे 29 परिवार अब मजदूरी करने को मजबूर हैं। बेबस किसानों ने अब न्याय के लिए कोर्ट की शरण ली है।

पूरा मामला पीथमपुर के पास काली बिल्लोद स्थित खसरा नंबर 278 की करीब 44 एकड़ की जमीन का है। 1976 में सरकार ने 29 अनुसूचित जनजाति (रळ) के परिवारों को शासन की एक योजना के तहत यह जमीन अलॉट की गई थी। उस समय शासन ने इन परिवारों को वन भूमि पर काबिज मानते हुए पट्टे दिए थे। राजस्व विभाग ने इन्हें राजस्व भूमि मानकर भू- अधिकार प्रमाण भी जारी किए थे।
नामांतरण में गड़बड़ी और रिकॉर्ड में बदलाव- मामले में वारिसों के नामांतरण में लापरवाही बरतने और दस्तावेजों में कथित हेरफेर करने का भी आरोप है। इसी का फायदा उठाकर भूमि के रिकॉर्ड में बदलाव किए गए। दरअसल, मार्च 2025 में इस जमीन को पहले औद्योगिक केंद्र विकास निगम को हस्तांतरित किया गया और बाद में इसे ह्यशक्ति पंप इंडस्ट्रीजह्ण को लीज पर दे दी गई।
बिना किसी सूचना के बेदखली– किसानों का कहना है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना और सुनवाई के जमीन से बेदखल करने की कोशिश की गई। मौके पर प्रशासन, पुलिस और उद्योग से जुड़े लोग पहुंचे और उन पर दबाव बनाया। मामले को आपराधिक प्रकृति का बताते हुए इनमें से 16 किसानों ने विशेष एससी-एसटी कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई।

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