14 मौतों की कीमत 2-2 लाख लगा दी, हमें पैसे नहीं, जवाब चाहिए

ब्रह्मास्त्र इंदौर

देश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में सफाई नहीं, अब सिस्टम की सड़ांध सामने आ गई है। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से गुरुवार को एक और मौत हो गई। इसके साथ गंदे पानी से मरने वालों की संख्या 14 पहुंच गई है। अब तक 1400 से ज्यादा लोग बीमार हो चुके हैं और 200 से अधिक मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं।

इसके बावजूद प्रशासन के पास कोई ठोस जवाब नहीं है कि पानी में ये जहर कैसे घुला? सरकार ने अब तक कोई जिम्मेदार तो तय नहीं किया, लेकिन 14 जानों की कीमत जरूर लगा दी। हर जान के हिसाब से 2-2 लाख रुपए तय किया गया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले में संज्ञान लिया है। आयोग ने मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में पूरी रिपोर्ट तलब की है।
लोगों ने नहीं लिया मुआवजे का चेक, विरोध ऐसा कि मंत्री को लौटना पड़ा- गुरुवार सुबह नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय दोपहिया वाहन से भागीरथपुरा पहुंचे। यहां दूषित पानी से जान गंवाने वाले 7 मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए के चेक दिए जाने थे। परिजनों ने चेक लेने से इनकार कर दिया। महिलाओं ने मंत्री का स्कूटर रास्ते में रोका और आरोप लगाया कि दो साल से गंदा पानी आ रहा है, पर बार-बार शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। लोगों ने कहा कि पैसे नहीं, जवाब चाहिए। लोगों के गुस्से को देखते हुए मंत्री को स्कूटर आगे बढ़ाने को कहना पड़ा।

रिपोर्ट में हैजा फैलाने वाला बैक्टीरिया मिला
भागीरथपुरा क्षेत्र में नर्मदा लाइन से सप्लाई हो रहे पानी को लेकर जांच रिपोर्ट ने हालात और गंभीर कर दिए हैं। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि यह पानी पीने और घरेलू उपयोग के लिए सुरक्षित नहीं है। नर्मदा प्रदाय शाखा की रिपोर्ट में पानी को असंतोषजनक बताया गया है। सैंपल में फीकल कॉलिफॉर्म, ई-कोलाई व क्लेबसेला जैसे बैक्टीरिया मिले हैं। इनसे उल्टी-दस्त, पेट दर्द का खतरा रहता है। सूत्रों के मुताबिक, इनमें हैजा फैलाने वाला विब्रियो कोलेरी भी मिला है। ये सैंपल रविवार से लगातार लिए जा रहे थे और नगर निगम, एमजीएम मेडिकल कॉलेज व स्वास्थ्य विभाग की लैब में भेजे गए। 80 सैंपल्स की जांच कराई गई। निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव ने कहा, कुछ सैंपल्स की रिपोर्ट मिली है। वे पॉजिटिव हैं। पानी को दूषित करने वाले तत्व पाए गए हैं। मरीजों को डॉक्सीसायक्लीन दी जा रही है, जो आमतौर पर हैजा के इलाज में इस्तेमाल होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि हैंगिंग ड्रॉप टेस्ट से एक घंटे में हैजा की पुष्टि हो सकती है, पर प्रशासन कल्चर रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। रिपोर्ट आने में दो से तीन लग सकते हैं।

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