सुख-समृद्धि की कामना के साथ महिलाओं ने किया दशा माता का पूजन

कायथा। हिन्दू धर्म मे कयी ऐसे व्रत और परंपराए है जिन्हें परिवार की खुश हाली और सम्रद्धि के लिए किया जाता है उन्ही मे से एक व्रत है दशामाता वृत यह व्रत खास तौर से सुहागिन महिलाएं करती है । होली के दस दिन बाद नवरात्रि से पांच दिन पहले चैत्र माह के क्रष्ण पक्ष की दसमी तिथि पर औंकारेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण मे शुक्रवार को महिलाओं ने पीपल के पेड़ की पूजा कर घर की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने एवं परिवार मे सुख शांति के लिए श्रद्धा विश्वास से दशामाता का वृत किया धार्मिक मान्यता अनुसार दशामाता वृत करने से उनके जीवन में आने वाली बाधाएं धीरे धीरे दूर होने लगती है जीवन में सकारात्मक बदलाव आते है पीपल के पेड़ मे भगवान् विष्णु का और देवी लक्ष्मी का वास माना जाता है यह व्रत जीवन की खराब परिस्थितियों को सुधारने के लिए किया जाता है अगर किसी व्यक्ति के जीवन मे लगातार समस्याएं आ रही है या काम बिगड़ रहे हो तो दशामाता वृत करने से स्थिति बेहतर हो सकती है तथा ग्रहों की खराब स्थिति का प्रभाव कम होता है इस कारण परिवार की सुख शांति और उन्नति के लिए महिलाएं इस व्रत को श्रद्धां विश्वास के साथ करती है तथा पीपल के पेड़ के निचे बैठ कर सामुहिक रुप से राजा नल एवं रानी दमयन्ती की कथा सुनते हैं घर आकार मुख्य द्वार पर हल्दी कुंम कुंम के छापे लगाये जाते है कच्चे सुत के डोरे मे गाठ लगाकर गले मे पहनती है एवं परिवार के बड़े बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर अखंड सोभाग्य का आर्शिवाद लिये जाते है
बड़नगर। शीतलासप्तमी पर्व के तीसरे दिन शुक्रवार को महिलाओं ने दशा माता का विधि-विधान से पूजन कर परिवार में मंगल की कामना की। इसके लिए महिलाओं ने व्रत रखकर दशा माता की कहानी भी सुनी। परिवार की सुख-समृद्धि के लिए आज महिलाओं ने उपवास रखकर दशामाता की पूजा अर्चना की। पूजन का दौर दिनभर चलता रहा। इस मौके पर महिलाओं ने भजन कीर्तन भी किए। महिलाओं ने पीपल के पेड़ पर सूत का धागा लपेटकर सुहाग के लंबी उम्र की कामना की और घर पहुंचकर दरवाजे के दोनों ओर हाथों में हल्दी लेकर पांच-पांच छापे लगाए। दशा माता की पूजन के बाद महिलाएं घर के दरवाजे पर हल्दी का छापा या रेखाचित्र बनाती है, मान्यता है कि ऐसा करते हुए महिलाएं अपने घर को बुराई और नकारात्मकता से बचाने के लिए देवी-देवताओं से प्रार्थना करती हैं।
महिदपुर। शहर सहित आसपास के क्षेत्रों में दशा माता का पर्व श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला यह व्रत घर की बिगड़ी हुई ‘दशा’ को सुधारने और परिवार में खुशहाली लाने के उद्देश्य से किया जाता है। सुबह से ही सुहागिन महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर सामूहिक रूप से मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों पर स्थित पीपल के वृक्ष के पास एकत्रित हुईं। महिलाओं ने पीपल की जड़ में जल अर्पित कर रोली, कुमकुम, अक्षत और पुष्प से विधिवत पूजन किया। पूजन के दौरान महिलाओं ने पीपल के चारों ओर 10 सूती धागे (डोरा) लपेटकर परिक्रमा की और अपने परिवार की सुख-शांति की कामना की। पूजन के पश्चात महिलाओं ने बैठकर दशा माता और राजा नल-रानी दमयंती की कथा सुनी। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और कथा सुनने से घर की दरिद्रता दूर होती है और माता की कृपा से जीवन के कष्ट मिट जाते हैं। कई महिलाओं ने इस अवसर पर गले में विशेष ‘दशा माता का डोरा’ भी धारण किया, जिसमें दस गांठें लगाई गई थीं।
पूजन के बाद कच्चा सूत गले में धारण कर घर की रक्षा का संकल्प लिया। उपवास रखकर सात्विक भोजन ग्रहण किया गया। शाम के समय घरों में विशेष पकवान बनाए गए और दान-पुण्य के कार्य भी किए गए। इस धार्मिक आयोजन से पूरे क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय बना रहा।
महिदपुर रोड। शुक्रवार को नगर के हिंदू समाज की महिलाओं ने दशा माता का पूजन किया। महिलाओं ने सुबह स्नान कर नये परिधान पहन कर पूजा करने वाले स्थान पर पहुंचकर विधिवत दशा माता की पूजा अर्चना की इससे पूर्व पूजा करने वाले स्थान स्थित पीपल के वृक्ष पर कच्चे सूत के धागे को पंडितों ने पीपल के वृक्ष को धारण करवाया इसके उपरांत महिलाओं ने पूजा अर्चना की । नगर के पोरवाल मंदिर, रेल्वे परिसर स्थित त्रिभुवन नाथ मंदिर सहित अनेक स्थानों पर महिलाओं ने पहुंचकर शीतला माता का पीपल के वृक्ष में उनका निवास मानकर उनकी पूजा अर्चना की महिलाओं ने विगत वर्ष में पूजा कर पहनी सूत की माला डोरे को चढ़ाकर नया सूत की माला गले में पहनी।
खातेगांव। खातेगांव में चैत्र कृष्ण पक्ष की दशमी पर महिलाओं ने दशा माता का पूजन किया। होलिका दहन के दसवें दिन मनाए जाने वाले इस व्रत में सुहागिन महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि, धन-संपत्ति और कष्टों से मुक्ति की कामना करती हैं। सुबह से ही शहर में धार्मिक वातावरण देखा गया। खेड़ापति मंदिर और दुर्गा मंदिर परिसर स्थित पीपल के वृक्ष के पास बड़ी संख्या में महिलाएं पूजा-अर्चना के लिए पहुंचीं। उन्होंने सोलह श्रृंगार कर थालियों में पूरी, पकवान और अन्य पूजा सामग्री सजाकर विधि-विधान से दशा माता की आराधना की।
पूजन के दौरान महिलाओं ने पीपल के वृक्ष को भगवान विष्णु का स्वरूप मानकर उसकी परिक्रमा की। उन्होंने कच्चे सूत के दस तारों से बने डोरे में दस गांठें लगाकर वृक्ष पर बांधा। इस अवसर पर दशा माता की कथा का श्रवण किया गया और कई महिलाओं ने दिनभर व्रत भी रखा।

 

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