सिलेंडर की किल्लत से होटल और व्यवसाय प्रभावित, गैस चूल्हों की जगह जला रहे भट्टी

सारंगपुर। नगर में इन दिनों कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी का असर बाजार और होटल व्यवसाय पर साफ दिखाई देने लगा है। गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से कई होटल संचालकों को मजबूरी में पुराने दौर की तरह लकडी की भट्टी का सहारा लेना पड रहा है। वर्षों से गैस चूल्हों पर संचालित हो रहे होटलों में अचानक लकडी के चूल्हे जलते देख लोग भी हैरान हैं। गैस की कमी का सीधा असर न केवल होटल व्यवसाय पर पड रहा है, बल्कि ग्राहकों को भी इंतजार करना पड रहा है। पहले जहां गैस चूल्हे पर नाश्ता और भोजन कुछ ही मिनटों में तैयार हो जाता था, वहीं अब लकडी की भट्टी पर वही काम करने में अधिक समय लग रहा है। होटल संचालकों का कहना है कि गैस सिलेंडर आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, जिसके कारण उन्हें मजबूरन पारंपरिक तरीके अपनाने पड रहे हैं।
व्यवसाय चलाना हो रहा है मुश्किल
होटल व्यवसायी सजन सोनी का कहना है कि फिलहाल किसी तरह काम चलाया जा रहा है, लेकिन यदि जल्द कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो होटल संचालकों के लिए व्यवसाय चलाना मुश्किल हो सकता है। वहीं एजेंसी के संचालको ने बताया कि कमर्शियल सिलेंडर लेने वाले संचालकों की सूची विभाग को भेज दी गई है। जैसे ही एजेंसी पर गैस की आपूर्ति बढेगी, प्राथमिकता के आधार पर होटल संचालकों को सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे।
वर्षो बाद फिर जली लकडी की भट्टी
होटल संचालकों ने कहा कि हम वर्षो से इस व्यवसाय से जुडे हैं। शुरूआती वर्षों में होटल का काम लकडी की भट्टी पर ही किया जाता था, लेकिन बाद में गैस चूल्हों के उपयोग से काम आसान और तेज हो गया। अब वर्षों बाद फिर से लकडी की भट्टी पर काम करना पड रहा है, जो काफी अलग अनुभव है। उनका कहना है कि पहले के कारीगर इस व्यवस्था में दक्ष होते थे, लेकिन आज की पीढी गैस चूल्हों पर काम करने की आदी हो चुकी है। इसलिए लकडी की भट्टी पर उसी गति से भोजन या नाश्ता तैयार करना संभव नहीं हो पा रहा है। इससे ग्राहकों को इंतजार करना पड रहा है और व्यवसाय की रफ्तार भी प्रभावित हो रही है।
लकडी की भट्टी पर काम करना खर्चीला
व्यवसायियों के अनुसार लकडी की भट्टी पर काम करना श्रमसाध्य होने के साथ खचीर्ला भी साबित हो रहा है। गर्मी के मौसम में भट्टी के पास खडे होकर काम करना कर्मचारियों के लिए चुनौती बन गया है। इसके अलावा आज के अधिकांश कारीगर गैस चूल्हों के आदी हो चुके हैं, इसलिए लकडी की भट्टी पर पहले जैसी गति से काम करना उनके लिए आसान नहीं है। इससे व्यापार पर भी असर पड रहा है और ग्राहकों को सेवा देने में अधिक समय लग रहा है।

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