शुजालपुर। प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य किए जाने के विरोध में शुक्रवार को शहर के शिक्षकों ने एकजुट होकर आवाज बुलंद की। अध्यापक संयुक्त मोर्चा एवं पुरानी पेंशन योजना के लिए राष्ट्रीय आंदोलन के बैनर तले बड़ी संख्या में शिक्षक तहसील कार्यालय पहुंचे और तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए परीक्षा निरस्त करने की मांग की।
ज्ञापन में शिक्षकों ने उल्लेख किया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत कार्यरत शिक्षकों के लिए दो वर्ष में शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य बताया गया है। इसके बाद लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल द्वारा जारी आदेशों से प्रदेशभर में शिक्षकों के बीच असंतोष की स्थिति निर्मित हो गई है।
शिक्षकों ने कहा कि वर्ष 1995 से 2023 के बीच शासन द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार शिक्षा कर्मियों एवं संविदा शाला शिक्षकों की नियुक्तियां की गई थीं। वर्ष 2005 में व्यावसायिक परीक्षा मंडल के माध्यम से भी नियमित भर्ती हुई थी। ऐसे में लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षकों पर नई पात्रता परीक्षा लागू करना उचित नहीं है।
सरकार से हस्तक्षेप की मांग
ज्ञापन में राज्य सरकार से आग्रह किया गया कि शिक्षक हितों को ध्यान में रखते हुए सर्वोच्च न्यायालय में प्रभावी पैरवी की जाए तथा कार्यरत शिक्षकों को परीक्षा से छूट दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। इस दौरान जितेंद्र यादव, जसमत सिंह बेस, मनोहर सिंह यादव, शिवम नेमा, गजराज कलवा, ओमप्रकाश मेवाड़ा, गजराज सिंह चंद्रवंशी, रामदयाल प्रजापति, आशीष जाट, बीरबल मीणा, लाड सिंह कुशवाहा, दिनेश शाक्यवार, राजेंद्र सिंह राजपूत, पवन नेमा, नकुल मालवीय सहित अनेक शिक्षक उपस्थित रहे।
पुरानी नियुक्तियों पर पात्रता परीक्षा का दबाव अनुचित