न डिग्री का पता है और न तकनीकी योग्यता का,सिखने और सिखाने पर चल रहा काम पैथालाजी लेब बनाम गोलमाल का धंधा…! -एक पैथालाजिस्ट और दर्जनों लेब की रिपोर्ट की पुष्टि

 

उज्जैन। स्वास्थ्य विभाग की नजरअंदाजी कहें या फिर प्रश्रय की शहर में संचालित कतिपय पैथालाजी लेब में गोलमाल का धंधा फल फूल रहा है। यहां न तो डिग्री का पता है और न ही तकनीकी योग्यता का । सिखने और सिखाने के आधार पर ही काम का संचालन किया जा रहा है। खास तो यह है कि एक ही पैथालाजिस्ट दर्जनों लेब की रिपोर्ट की पुष्टि कर रहा है। इसके बाद भी स्वासथ्य विभाग कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।

पैथालाजी हो या फिर क्लिनिक सभी के पंजीयन स्वास्थ्य विभाग में होते हैं। बगैर पंजीयन के इनका संचालन कानून जूर्म है। नियमों के तहत पंजीयन के बाद सीधे तौर पर नियमों की अवहेलना का काम कतिपय लेब पर हो रहा है। इसे लेकर मात्र कागजों में ही जांच हो रही है और कागजों में ही सब कुछ सही चल रहा है। धरातल पर नियमों को ताक में रखकर पैथालाजी संचालन का काम चल रहा  है।

क्या कहते है नियम..?

स्वास्थ्य विभाग के स्पष्ट नियम है कि किसी भी पैथोलॉजी लैब का संचालन पंजीकृत पैथोलॉजिस्ट (एमडी पैथोलॉजी) की देखरेख में ही होना चाहिए। लैब का विधिवत पंजीकरण होना अनिवार्य है। बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट और गुणवत्ता नियंत्रण के नियमों का पालन इसमें जरुरी है।

नियमों में यह है अनिवार्य स्टाफ और योग्यता-

जांच पैथालाजिस्ट  (एमडी) की निगरानी में होना अनिवार्य है । इसके साथ ही उसे रिपोर्ट की पुष्टि के साथ उस पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य है। लेब में ट्रेंड लैब टेक्नीशियन जो कि सैंपल कलेक्शन, टेस्ट प्रोसेसिंग, मशीन संचालन कर सके। फ्लेबोटॉमिस्ट/सैंपल कलेक्टर जो कि सुरक्षित तरीके से सैंपल लेने के कार्य को अंजाम दे सके। इसके साथ ही सहायक स्टाफ-साफ-सफाई, रिकॉर्ड मेंटेनेंस।डेटा एंट्री / रिसेप्शन स्टाफः मरीजों का रजिस्ट्रेशन और रिपोर्ट वितरण के कार्य के लिए आवश्यक हैं।

इन पदों पर काम करने वालों की योग्यता का प्रमाणिकरण आवश्यक हैं।

 

Share:

संबंधित समाचार

Leave a Comment