सारंगपुर। नगर का अंबे माता मंदिर नगर के बीचो-बीच त्रिपोलिया चौक में स्थित यह भव्य मंदिर नगर वासियों के लिए हमेशा से ही आस्था और श्रद्धा का केंद्र रहा है। नगर के सभी बडे धार्मिक सामाजिक आयोजनो की शुरूआत यहीं से होती है। नवरात्रि में तो यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। चेत्र नवरात्र के दूसरे दिन मंदिर के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ रही। यह दौर शेष दिनों में भी जारी रहेगा।
मंदिर का इतिहास
ऐसी मान्यता है कि मंदिर में जो प्रतिमा है वह खुदाई में मिली थी। जो लगभग साढ़े तीन सौ वर्ष पुरानी है। लगभग ढाई से 3 फीट ऊंची यह प्रतिमा काले पाषण की बनी हुई है। मंदिर के गर्भगृह के पीछे अंजनी लाल की मूर्ति है, आगे गुप्तेश्वर महादेव व मुख्य द्वार पर सती माता का चित्र पत्थर पर उकेरा हुआ है।
मंदिर की विशेषता
मंदिर में विशेष बात यह है कि इसका मुख्य प्रवेश द्वार पूर्व दिशा में है जो अपने आप में विशेष महत्व रखता है। मूर्ति प्रारंभ में ही एक छोटे से चबूतरे पर स्थापित थी जो बाद में धीरे-धीरे भव्य मंदिर की शक्ल लेकर आज नगर की ऐतिहासिक धरोहर में शुमार है। नगर की हिंदू उत्सव समिति, महादेव मित्र मंडल व मंदिर की महाभारत समिति सभी धार्मिक आयोजनों का श्रीगणेश इसी स्थान से प्रारंभ करती है तथा समापन भी यही होता है। नगर के बीचो-बीच होने के कारण सभी पर्वों पर अच्छी खासी भीड बनी रहती है। शारदीय नवरात्रि में गरबा उत्सव में मंदिर में भीड नहीं समा पाती है।, प्रारंभ में मंदिर परिसर के अंदर गरबो का आयोजन होता है। किंतु धीरे-धीरे धर्म जन की संख्या बढने के कारण मंदिर के मुख्य द्वार के बाहर खुले मैदान पर गरबो का आयोजन होने लगा। सभी धार्मिक आयोजनों में नागरिक जी- जान से सहयोग करते हैं दोनों ही नवरात्रि में नौवे व अंतिम दिन कन्या भोज के साथ भंडारे का आयोजन भी किया जाता है।
शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर इसी स्थान से चुनरी यात्रा निकाली जाती है। जो नगर में भ्रमण कर भेंसवा माता मंदिर तक पैदल श्रद्धालु जन जाते हैं और सभी समारोह पूर्वक इस यात्रा को संपन्ना करते हैं। इस वर्ष से पुन: सभी धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रमो पूर्ण उत्साह से मनाए जा रहे है।
नवरात्र विशेष: खुदाई के दौरान निकली प्रतिमा, 350 वर्ष पुरानी है मूर्ति