खुसूर-फुसूर नजूल पर खेल…! शहर की संस्था में इन दिनों बाले –बाले एक जमीन को ढूंढा जा रहा है।

खुसूर-फुसूर

नजूल पर खेल…!

शहर की संस्था में इन दिनों बाले –बाले एक जमीन को ढूंढा जा रहा है। मामला नामांतरण से उपजा बताया जा रहा है। खिलचीपुर से गयाकोठा जाने वाले मार्ग के आवासों में से कुछ का यह मामला है। यहां के मकानों के क्रय –विक्रय के बाद संबंधित विभाग ने फीस लेकर पंजीयन कर दिया। इसके बाद खरीदने वाला नामांतरण के लिए पहुंचा तो मामला पेचिदा हो गया। जमीन कहां से आई ढूंढना शुरू हुआ लेकिन महीनों बाद भी यह सामने नहीं आ रहा है कि जमीन आसमान से टपकी या हवा से आकर यहां जम गई। सर्वे नंबर और पूर्व मालिक का खसरा नंबर ही सामने नहीं आ रहा है। एक बार नहीं अनेक बार यह स्थिति तलाश ली गई लेकिन फिर भी हाल वही कायम रहे हैं। सालों पहले नाला सकरा हुआ तो जमीन निकल आई । सडक बनी और पास में अच्छी खासी जमीन को देखने के बाद कुछ जानकारों ने फ्री के माल पर हक जताने में कोई देर नहीं की। बाले –बाले ही गड्डों में कचरा और मटेरियल डलता गया और फिर अच्छा खासा प्लाट बन गया। देखते ही देखते मकान बनाकर बेच दिए गए और बडे ही योजनाबद्ध रूप से रजिस्ट्री हो गई। खुसूर-फुसूर है कि नजूल की जमीन को लेकर पिछले 25 वर्षों में शहर में भी काफी कुछ ऐसा ही हुआ है। नाले के आसपास की जमीन हो चाहे तालाब के आसपास के डूब की जमीन हो ऐसी जमीनों पर खेल कर दिया गया। ऐसे ही एक मामले में इंदौर रोड तालाब के पास की जमीन पर कालोनाईजर ने बिल्डिंग बना दी और माल बटोरकर रवाना हो गए। भ्रष्टाचार रोकने वाली संस्था जांच कर ही रही है। ऐसे और भी मामले हैं जहां नजूल फिजूल से माल बटोर लिया गया और सब कुछ गुड मंथन हो गया।

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