एक बार फिर महिर्षि सांदिपनी वेद विद्या प्रतिष्ठान की कार्यपद्धति सवालों के घेरे मेंपहले सेवा मुक्ति आदेश जारी हुआ या विडियो वायरल…!-छात्र अत्याचार के मामले में छात्र संगठन ने मोर्चा खोला,प्रदर्शन किया, विद्यालय के छात्र नजरबंद

उज्जैन। महिर्षि सांदिपनी राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान की कार्यपद्घति एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। मामला है छात्र के साथ शिक्षक के बेरहमी से बेंत से मारपीट का । इस मामले में चिंतामन थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया है। इधर प्रतिष्ठान ने संबंधित शिक्षक को विडियो वायरल होने वाले दिन ही सेवा मुक्ति दे दी थी। प्रतिष्ठान के सचिव के कार्यालयीन आदेश के बाहर आने के बाद यह खुलासा हो रहा है। इस खुलासे के साथ ही प्रतिष्ठान परिसर में संचालित आवासीय विद्यालय की कार्य पद्धति भी सवालों के घेरे में हैं।

छात्र के साथ शिक्षक के बेंत से बेरहमी से मारपीट के मामले का विडियो शनिवार शाम को वायरल हुआ था। इसे लेकर प्रतिष्ठान के सचिव के पास मिडिया के सवालों भरे मोबाईल काल निरंतर पहुंच रहे थे। मिडिया को घटना और उसके कारणों से प्रतिष्ठान की और से जानकारी देकर अवगत करवाने की बजाय सीधे तौर पर नजरअंदाज ही किया गया है। विडियो में शिक्षक की आवाज में सुनाई दे रही बातें आम पाठक ही नहीं मिडिया में भी जिज्ञासा पैदा कर रही है कि ऐसा क्या कारण था जिसे लेकर बच्चे के दुसरे के बेड पर सोने को लेकर शिक्षक ने ऐसा हंगामा किया और अन्य वेद के शिक्षक वहां बैठकर इस पाशविक कृत्य को देखते रहे। इस पूरे मुद्दे पर प्रतिष्ठान की और से सचिव प्रेस से बात करने को तैयार नहीं है। जिससे मामला गहराता जा रहा है। विद्यालय मे करीब 5 दर्जन से अधिक बच्चे वेद का ज्ञान ले रहे हैं।

आदेश के बाद उठे सवाल-

प्रतिषठान सचिव ने विडियो वायरल होने वाले दिन ही बेरहम शिक्षक को सेवा मुक्ति दे दी। सचिव ने अपने 21 मार्च के कार्यालय आदेश में इसे स्पष्ट किया है। उन्होंने कार्यालय आदेश में दत्तदास रघुनाथ शेवडे, सामवेद राणायनीय शाखा अध्यापक एवं वार्डन, राष्ट्रीय आदर्श वेद विद्यालय, उज्जैन द्वारा सेवामुक्त करने के लिए दिए गए आवेदन दिनांक 21-03-2026 को स्वीकार करते हुए श्री शेवडे को राष्ट्रीय आदर्श वेद विद्यालय, उज्जैन की सभी संविदा सेवाओं से तत्काल प्रभाव से सेवामुक्त किए जाने का उल्लेख किया है। सवाल यह उठ रहा है कि वायरल विडियो 15 मार्च की रात का सामने आया है। सचिव के आदेश में शिक्षक के सेवा मुक्ति आवेदन का उल्लेख किया जा रहा है जिसे उसी दिन स्वीकार करने की स्थिति से ही सवाल खडे हो रहे हैं। प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन इसमें नहीं किया गया है। सेवा मुक्ति के नियमों को भी इसमें दरकिनार किया गया है। खास तो यह है कि संबंधित शनिवार को अवकाश की स्थिति थी। केंद्रीय अवकाश नियमों के तहत इस पूरी प्रक्रिया पर ही सवाल खडे हो गए हैं। इससे यह भी सवाल खडे हो रहे हैं कि विडियो वायरल होने के पहले घटना की जानकारी प्रतिष्ठान को थी तो फिर मामले में शिक्षक पर क्या कार्रवाई की गई। ऐसे ही अन्यानेक प्रश्न प्रतिष्ठान के कर्ताधर्ता पर उठ खडे हुए हैं। इस मामले में अंदर के सूत्रों का कहना है कि शिक्षक यहां से ए प्लस की चरित्रावली के साथ कार्य मुक्त हो गए हैं।

 बच्चों नजर नहीं आ रहे-

 रविवार को चिंतामन थाना पुलिस के प्रकरण दर्ज करने और बच्चे से जानकारी लेने के बाद से आवासीय विद्यालय के द्वारों पर सख्ती कर दी गई है। बच्चों को किसी से भी बातचीत नहीं करने दी जा रही है। मिडिया का तो पहुंचना ही दुष्वार हो गया है। सोमवार को भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के छात्र नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने प्रतिष्ठान गेट पर बच्चों से मिलने के लिए गुहार लगाई लेकिन किसी भी बच्चे से उन्हें नहीं मिलने दिया गया है। यहां पर बहुत देर तक पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी के साथ छात्र संगठन के बच्चों की इस मामले को लेकर जिरह होती रही लेकिन सीधे तौर पर उन्हें यह नहीं बताया गया कि बच्चे आवासीय विद्यालय में हैं या कहां गए हुए हैं। कुल जमा आवासीय विद्यालय के बच्चों को किसी से भी बात करने पर अघोषित तौर पर रोक लगा दी गई है।

छात्र संगठन का प्रदर्शन-

 सोमवार को दोपहर में छात्र संगठन के करीब दो दर्जन कार्यकर्ता एवं नेता प्रतिष्ठान पर पहुंचे थे। उनके पहुंचने से पूर्व ही प्रतिष्ठान पर पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी भी पहुंच चुके थे। छात्रों ने अपनी प्रवृत्ति के अनुसार यहां नारेबाजी करते हुए धरना दिया है। उन्होंने यहां वेद अध्ययन करने वाले बच्चचों से मिलने की इच्छा भी जताई जिसे रोक दिया गया और उन्हें स्पष्ट किया गया कि अगर वे अंदर जबरिया गए तो उनके विरूद्ध वैधानिक कार्रवाई हो सकती है। इस दौरान प्रदर्शन करने आए छात्रों ने अंदर के वेद अध्ययन करने वाले छात्रों की स्थिति जानने को लेकर तर्क किया तो उन्हें कह दिया गया कि इसकी जानकारी प्रतिष्ठान के अधिकारी देंगे। जब प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे बात करने ही नहीं आ रहे हैं तो पुलिस एवं अधिकारियों ने कहा कि इसे लेकर हम कुछ नहीं कह सकते। प्रदर्शनकारियों ने आवासीय विद्यालय के वेद पाठी छात्रों के अघोषित नजरबंद करने का सवाल भी उठाया लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं दिया गया।

आदेश बाहर आया,घटना पर बयान नहीं-

 प्रतिष्ठान से 21 मार्च को विडियो वायरल होने वाले दिन सेवा मुक्ति के आदेश को दुसरे दिन देर रात को बडे ही तरीके से कुछ लोगों के माध्यम से मिडिया तक पहुंचाया गया। जिससे की यह तय हो जाए कि प्रतिष्ठान के जिम्मेदार मामले में कार्रवाई कर रहे हैं लेकिन पूरे मामले को लेकर मिडिया को कोई बयान जारी नहीं किया गया है। इससे कई सारे सवालों का पैदा होना वाजिब है। प्रतिष्ठान के सचिव सहित अन्य अधिकारियों ने भी पूरे घटनाक्रम को लेकर चुप्पी साध ली है । मामले को ठंडा करने में लगे हैं।

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