इंदौर में 35 मौतों के मामले में नया मोड़: हाईकोर्ट में वकील का दावा- ओवरहेड टैंक में पोटेशियम क्लोराइड टैबलेट डाली, प्राइवेट दुकान से खरीदी

ब्रह्मास्त्र इंदौर

इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हो रही मौतों के मामले में गुरुवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। जांच आयोग ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट अदालत में पेश की। कोर्ट ने आयोग को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के लिए 30 दिन का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी।

सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट अजय बागडिया ने अतिरिक्त तथ्यों को रिकॉर्ड पर लाने के लिए एक अंतरिम आवेदन प्रस्तुत किया। इसमें दावा किया कि भागीरथपुरा के वार्ड क्रमांक 11 के ओवरहेड टैंक में कथित रूप से पोटैशियम क्लोराइड की टैबलेट डाली गई थीं।
अजय बागडिया ने दावा किया कि ये टैबलेट नगर निगम की आधिकारिक खरीद प्रक्रिया के बाहर एक निजी दुकान से खरीदी गई थीं। इन्हें मौखिक निदेर्शों के आधार पर टैंक में डाला गया था। जबकि पोटैशियम क्लोराइड पीने के पानी को शुद्ध करने के लिए स्वीकृत पदार्थ नहीं है। ऐसे में इस पूरे मामले की निष्पक्ष पुलिस जांच कराए जाने की मांग की गई है।

शहर में तीन सोर्स से होती है पानी की सप्लाई- सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि इंदौर शहर में पेयजल की आपूर्ति मुख्य रूप से तीन प्रमुख स्रोतों से होती है। इनमें नर्मदा जल योजना, यशवंत सागर बांध और बिलावली तालाब शामिल हैं। इन सोर्स से आने वाले पानी को जलूद वाटर स्टेशन सहित अन्य जल शोधन केंद्रों पर शुद्ध किया जाता है। यहां क्लोरीनीकरण और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं के बाद पानी को शहर के लगभग 108 से 110 ओवरहेड टैंकों तक भेजा जाता है। इसके बाद इन्हीं टैंकों से पाइपलाइन के जरिए अलग-अलग इलाकों में घरों तक पानी की सप्लाई की जाती है।

पोटैशियम क्लोराइड की टैबलेट से गंभीर खतरा- याचिका में यह भी कहा गया कि पोटेशियम क्लोराइड नगर निगम के वॉटर प्यूरीफिकेशन प्रोटोकॉल या कर 10500:2012 पीने के पानी के मानकों के तहत स्वीकृत डिसइंफेक्टेंट नहीं है। यह न तो क्लोरीनेशन एजेंट है और न ही किसी प्रकार का जमीर्साइडल पदार्थ। अगर ओवरहेड टैंक में वास्तव में पोटैशियम क्लोराइड की टैबलेट डाली गई थीं, तो इसे नगर निगम की साफ पेयजल आपूर्ति में अनधिकृत हस्तक्षेप माना जाएगा। इससे लोगों की सेहत को गंभीर खतरा है।

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