अति विशिष्ट वन्य जीवों के लिए संभाग के दो जिले प्रदेश मानचित्र पर आए खिवनी में बाघ का तो गांधीसागर में चीतों का ठिकाना

उज्जैन। उज्जैन संभाग भी अति विशिष्ट वन्य जीवों  वाले संभाग में शुमार हो गया है। संभाग के दो जिलों में अतिविशिष्ट वन्य जीवों का घर बन गया है। दोनों जिले प्रदेश के साथ राष्ट्रीय वन्यजीव मानचित्र पर अपना स्थान बनाने में सक्षम हुए हैं। संभाग के देवास जिला अंतर्गत खिवनी वन्यजीव अभ्यारण्य मेंबाघ को देखने के लिए पर्यटक जुटने भी लगे हैं। मंदसौर के गांधीसागर में अभी कुछ देर है।उज्जैन संभाग के सात में से 2 जिले देवास एवं मंदसौर वन्यजीवों को लेकर राष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान बनाने में लगे हुए हैं। दोनों ही जिलों में विशिष्ट वन्यजीवों बाद्य एवं चीता का घर बन गया है। देवास में तो पर्यटकों के जुटने की स्थिति भी चल रही है मंदसौर में अभी ऐसा होना शेष हैं। इसके चलते वन पर्यटन को खासा बढावा संभाग में मिलेगा।गांधी सागर में बढेंगे चीता-मंदसौर जिले में स्थित गांधी सागर वन्यजीव अभ्यारण्य अब चीतों के लिए सुरक्षित और सफल आवास के रूप में उभर रहा है। कुनो नेशनल पार्क के बाद इसे देश का दूसरा प्रमुख चौता केंद्र बनाने की दिशा में काम तेज हो गया है। यहां फिलहाल दो नर और एक मादा सहित कुल तीन चीते मौजूद है। भविष्य में 8 से 10 और चीते यहां लाने की तैयारी की जा रही है। 20 अप्रैल 2025 को कुनो नेशनल पार्क से दो नर चीते प्रभास और पावक को गांधी सागर अभ्यारण्य लाया गया था। इसके बाद 17 सितंबर 2025 को मादा चीता मीरा को भी यहां स्थानांतरित किया गया। वर्तमान में तीनों चीते 64 वर्ग किलोमीटर के बड़े बाड़े में रह रहे हैं और प्राकृतिक माहौल में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।देश में चल रहे प्रोजेक्ट चीता के तहत चीतों की कुल संख्या अब 48 हो गई है। उनमें से अधिकांश यानी 45 पीते कुनी नेशनल पार्क में हैं। गांधी सागर अभ्यारण्य को दूसरा प्रमुख केंद्र बनाने की योजना पर काम जारी है। जल्द होने वाली बैठक में यह तय किया जाएगा कि यहां कितने और चीते लाए जाएंगे। योजना के तहत अफ्रीकी देशों, विशेष रूप से बोत्सवाना से 8 से 10 और चीतों को लाने की तैयारी चल रही है।वन विभाग के एसडीओ अमित राठौर के मुताबिक प्रभास और पावक भाई होने के कारण नए वातावरण में जल्दी ढल गए। दोनों चीते अब तक करीब 12,150 किलोमीटर से अधिक दौड़ चुके हैं, जो उनकी सक्रियता और अच्छे स्वास्थ्य का संकेत है। अभ्यारण्य में उनके रहने के 318 दिन पूरे हो चुके हैं और वे यहां के वातावरण में पूरी तरह अनुकूल हो गए हैं।यहां गिद्धों की संख्या में भी बढ़ोतरी चीता प्रोजेक्ट का सकारात्मक असर अन्य वन्यजीवों पर भी देखने को मिल रहा है। अभ्यारण्य क्षेत्र में गिद्धों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। चीतों के शिकार के बाद बचे अवशेष गिद्धों के लिए भोजन का स्रोत बन रहे हैं, जिससे उनका आवास और भी अनुकूल हो गया है।देवास में युवराज एवं मीरा छाए-देवास के खिवनी अभ्यारण्य में बाद्यों की उपस्थिति को लेकर एक दशक पूर्व वन विभाग स्वीकार नहीं करता था। अब हाल यह हैं कि यह बाद्यों की सबसे पसंदीदा स्थली के रूप में देखा जा रहा है। कुछ वर्षों पूर्व खिवनी में तत्कालीन वन मंडलाधिकारी पीएन मिश्रा के नेतृत्व में किए गए कार्यों का नतीजा यह सामने आया कि अब यहां करीब आधा दर्जन बाद्यों की उपस्थिति हुई है। अब तो यहां बाद्यों के लिए पर्यटन का काम भी शुरू हो चुका हैं। सैंकडों पर्यटक यहां पहुंचने लगे हैं। यहां नर बाद्य युवराज एवं मादा मीरा के साथ उसके दो शावकों को देखने के लिए जमकर पर्यटक आ रहे हैं।

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