मनरेगा से मजदूरों को रोजगार देने के दावे पर भी सवाल उठने लगे हैं, मजदूरों को काम तो मिला, लेकिन मजदूरी नहीं

उज्जैन। पूरे प्रदेश के साथ ही अब उज्जैन जिले में भी मजदूरों का पलायन रोकने और स्थानीय तौर पर रोजगार उपलब्ध कराने की कोशिशों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। मनरेगा से मजदूरों को रोजगार देने के दावे पर भी सवाल उठने लगे हैं। क्योंकि मजदूरों को काम तो मिला, लेकिन मजदूरी नहीं। इससे उनके समक्ष रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है।

हालत यह है कि प्रदेश में काम करने वाले 36 लाख से अधिक मजदूरों की 575.81 करोड़ मजदूरी का भुगतान बकाया है। यही नहीं इसी योजना में विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए उपयोग की गई सामग्री का भी 819.04 करोड़ भुगतान बाकी है। सरकार इसकी समय-सीमा बताने के लिए भी तैयार नहीं है कि इन मजदूरों को उनके हक की राशि कब तक मिल जाएगी। इससे इनका होली का त्योहार भी फीका ही मनेगा।
विधानसभा के बजट सत्र में विधायक बाला बच्चन के प्रश्न के लिखित जवाब में श्रम एवं पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने यह जानकारी दी है। इसमें उन्होंने साफ कहा है कि मजदूरी एवं सामग्री की राशि भारत सरकार एवं राज्य सरकार से प्राप्त होकर व्यय किया जाना एक सतत प्रति या है। इसलिए इस बकाया राशि के लिए भुगतान की समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। मंत्री ने बताया 2024-25 (31.03.2025) तक वित्तीय वर्ष 2023-24 में राशि 43.74 करोड़ एवं 2024-25 में 878.11 करोड़ कुल 921.85 करोड़ रुपए भारत सरकार से लेना शेष थी। केन्द्र द्वारा राशि जारी करने के लिए मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद की तरफ से पिछले दो साल में चार बार पत्राचार किया गया। पहले उपयोगिता प्रमाणपत्र नहीं दिए जाने के कारण राशि अटकी हुई थी। लेकिन इसके बाद उपयोगिता प्रमाणपत्र भी भेज दिए गए हैं, इसके बावजूद केन्द्र ने राशि जारी नहीं की है। राज्य के पास भी इतना पैसा नहीं है कि मजदूरों की यह मजदूरी और सामग्री की राशि चुका सके। इसलिए केन्द्र से पैसा आने के बाद ही इन मजदूरों को मजदूरी की राशि मिलना संभव है। अब तक 2025-26 में सरकार ने क्रियान्क्र्थन एजेंसी को 2024-25 एवं 2025-26 में लंबित बिलों के भुगतान के लिए राशि जारी की। बता दें, मनरेगा में स्थानीय लोगों को रोजगार देने के लिए विभिन्न निर्माण कराए जाते हैं।

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