खुसूर-फुसूर गर्भगृह प्रवेश पर तनातनी…

खुसूर-फुसूर

गर्भगृह प्रवेश पर तनातनी…

मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश को लेकर पिछले काफी समय से समाज में अनेकानेक प्रकार के व्यक्तव्य सामने आ रहे हैं। शहर का आमजन भी यही चाहता है कि गर्भगृह में प्रवेश दिया जाना चाहिए । उसके लिए कोई नियम ,समय,योजना तय की जाना चाहिए।7 विधानसभा क्षेत्र के नेतृत्वकर्ता से लेकर एक विधानसभा के माननीय भी इस पर अपनी बात रख चुके हैं। इब मामला आपसी तनातनी में बढता जा रहा है। अखाडा प्रमुख की और से उठाए गए कदम पर पुजारी संगठन आमने-सामने हैं। मंदिर समिति प्रशासक के पास पुरे अधिकार सुरक्षित हैं। मंदिर के एक्ट में प्रशासक की नियुक्ति ही होती है। उसके उपरांत उपविधि के तहत सब कार्य होते हैं। ऐसे में प्रशासक का दायित्व महत्वपूर्ण बन पड रहा है। मंदिर के गर्भगृह प्रवेश पर हाल ही के दिनों में अलग-अलग जनप्रतिनिधियों के बयान सामने आए हैं,लेकिन व्यवस्था में परिवर्तन देखने में नहीं आ रहा है। स्थिति यह बन रही है कि अब तक गर्भगृह में प्रवेश की मांग रखने वाले संगठन आपस में ही उलझते दिखाई दे रहे हैं,व्यवस्था पर नहीं । एक दुसरे पर ही सवाल खडा करने की स्थिति यहां सामने आ रही है। इससे यह पूरा मामला ही पेचिदा होता जा रहा है । इसमें कहीं भी आम श्रद्धालू हित की स्थिति के तहत पक्ष नहीं रखा जा रहा है। खुसूर-फुसूर है कि पूर्व जिला प्रशासक ने पहली बार पास के शहर से भ्रमण पर आए मिडिया के समक्ष खुले मन से यह बात स्वीकारी थी की श्रद्धालुओं की संख्या के सामने गर्भगृह में प्रवेश का मसला श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर सवाल रहेगा। ऐसे में अब गर्भगृह प्रवेश संभव नहीं है। श्रद्धालुओं का मत है कि ऐसी स्थिति में श्रद्धालुओं एवं भगवान के बीच की दूरी को घटाना जाए। इसके लिए नंदी के ठीक पीछे तक बेरिकेडस को लगाया जाए और वहीं पर जल पात्र की व्यवस्था की जाए। बेरिकेड्स फोल्डिंग रखे जाएं जो सुबह की आरती के समय फोल्ड कर नंदी हाल बना दिया जाए। इतने श्रद्धालुओं की स्थिति में सबसे बडा प्रश्न तो सुरक्षा का ही है।

 

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