कुपोषण रोकने की कवायद लेकिन आहार आपूर्ति में ठेकेदारों की एंट्री कराने के लिए जोर

उज्जैन। पूरे प्रदेश के साथ ही उज्जैन जिले में  भी कुपोषण रोकने की कवायद तो की जा रही है लेकिन पोषण आहार आपूर्ति के मामले में नई जानकारी सामने आई है और वह यह है कि
एक बार फिर पोषण आहार आपूर्ति में ठेकेदारों की एंट्री करवाने के लिए महिला बाल विकास विभाग एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए है।

भोपाल सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार  मुख्य सचिव अनुराग जैन ने ठेकेदारों की नीति से इनकार किया तो अब मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष भेजा जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों में छह वर्ष तक के बच्चों के साथ किशोरी बालिका, गर्भवती और धात्री माताओं को दिया जाने वाला टेक होम राशन का पोषाहार ठेकेदार तैयार करेंगे या स्व-सहायता समूह, मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव तय करेंगे।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत आने वाले आजीविका मिशन के महिला स्व-सहायता समूह के महासंघ अभी सात पोषाहार संयंत्रों में इसे तैयार करते हैं। आपूर्ति में विलंब, वित्तीय हानि आदि को देखते हुए व्यवस्था को फिर से महिला एवं बाल विकास विभाग को देने की तैयारी है, जो ठेकेदारों के माध्यम से पोषाहार तैयार कराएगा। इसका प्रस्ताव बन चुका है पर मुख्य सचिव अनुराग जैन ने इसे यह कहकर लौटा दिया कि हाई कोर्ट ने जो व्यवस्था दी थी, उसके आधार बताए जाएं।
विभाग ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। अब इस विषय पर मुख्य सचिव के स्तर पर एक बैठक और होगी, फिर प्रक्ररण मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा। उनको हरी झंडी मिलने के बाद ही इसे कैबिनेट के अंतिम निर्णय के लिए रखा जाएगा। संभावना यह भी है कि तीन माह के लिए वर्तमान व्यवस्था को जारी रखा जा सकता है। महिला बाल विकास विभाग का पोषण आहार से विशेष प्रेम रहा है।

प्रदेश में वर्षभर में 1,200 करोड़ रुपये का पोषाहार आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से तीन वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती, धात्री माताओं और किशोरियों को दिया जाता है। इस बीच आजीविका मिशन ने व्यवस्था में परिवर्तन को देखते हुए 31 मार्च तक का पोषण आहार तैयार करने के लिए कहा है।

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