April 18, 2024

उज्जैन। संजीवनी अस्पताल में मंगलवार सुबह उस वक्त हंगामा हो गया, जब दुर्घटना में घायल महिला की मौत की खबर प्रबंधन ने परिजनों को दी। सात दिनों में लाखों रुपये खर्च चुके परिजनों के धैर्य का बांध टूटा गया। उन्होंने जमकर तोडफ़ोड़ शुुरु कर दी। बेटी ने आरोप लगाया कि पैसे जमा नहीं कराये तो वेंटिलेटर हटा दिया था। देवासरोड पर 20 फरवरी को नलिया बाखल में रहने वाली वाली शशीकला कुशवाह 50 वर्ष पति हजारीलाल के साथ एक्टिवा से देवास जाते समय सड़क हादसे का शिकार हो गई थी। सिर में गंभीर चोंट लगने से वह बेहोशी की हालत में चली गई थी। परिजन उपचार के लिये संजीवनी अस्पताल लेकर पहुंचे थे, जहां डॉ. रुपेश खत्री ने 3 ऑपरेशन किये। होश नहीं आने पर वेंटिलेटर पर रखा गया। सोमवार सुबह अस्पाल की ओर से परिजनों को खबर दी गई कि शशीकला का निधन हो गया है। डेडबॉडी ले जा सकते है। निधन की खबर सुनते ही परिजनों को आक्रोश फूट पड़ा। उन्होने अस्पताल में तोडफ़ोड़ शुरु कर दी। उनका आरोप था कि 7 लाख रुपये लगाने के बाद भी हमें कुछ दिन में होश आने और ठीक होने का आश्वासन दिया जा रहा था। परिजनों ने हंगामा करते हुए अस्पताल के बाहर जाम लगा दिया था। हंगामे और तोडफ़ोड़ की खबर मिलते ही माधवनगर टीआई मनीष लोधा और पुलिस टीम संजीवनी पहुंची। परिजनों को समझाया गया और अस्पताल का शेष बिल 70 हजार रुपये माफ कराकर बॉडी परिजनों के सुपुर्द कराई गई।