आज वट सावित्री पर्व व शनि जयंती एक साथ , विशेष योग में पूजा का महत्व

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इंदौर। वट सावित्री और शनि विशेष जयंती का विशेष योग बना रहा है। जहां एक और वट सावित्री पर्व के अवसर पर उपवास रखा जाएगा। जो भी श्रद्धालु उपवास रखें वह इस मंत्र का जाप करते हुए अपनी मनोकामना मांगे। देहि सौभाग्य आरोग्यं देहि मे परमं सुखम्।पुत्रान देहि सौभाग्यम देहि सर्व कामांश्च देहि मे।
रुपम देहि जयम देहि यशो देहि द्विषो हैं। दूसरी और
शनि जयंती ( भानु पुत्र, देवों के न्यायाधीश, कर्मफल दाता भगवान शनि का जन्मोत्सव) होने से वट सावित्री पर्व और भी विशेष रहेगा।
वट सावित्री का उपवास जेष्ठ मास की अमावस्या तिथि को किया जाता है। वट सावित्री पर विवाहित स्त्रियां वट वृक्ष की पूजा करती है। धार्मिक मान्यतानुसार वटवृक्ष की छांव में देवी सावित्री ने अपने पति को पुनः जीवित किया था। इसी दिन से वट वृक्ष की पूजा का विधान है। वट वृक्ष को भगवान शिव का प्रतीक माना गया है।
इस वर्ष वट सावित्री पर्व पर कुछ विशेष योग बनने जा रहे हैं। गजकेसरी योग, बुधादित्य योग, महालक्ष्मी योग, धृति योग, चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र अपनी उच्च राशि में बैठकर शुभ फल प्रदान करेंगे तथा शनिदेव अपनी स्वराशि कुंभ में विराजमान होकर सभी पर कृपा बरसाएंगे। (इस वर्ष दांपत्य जीवन के कारक ग्रह शुक्र देव अस्त होने के कारण नव विवाहित स्त्रियां प्रथम बार उपवास प्रारंभ नहीं करेंगी)

आज यह करें —

जिन जातकों की कुंडली में शनि की महादशा शनि की साढ़ेसाती एवं शनि की ढय्या का प्रभाव है उन सभी को शनि जयंती पर विशेष उपाय करें–
शनि मंदिर में लोहे का चार मुखी दीप प्रज्वलित करें।
काली वस्तुओं का दान करें।
हनुमान चालीसा का 11 बार पाठ करें।
काले कुत्ते को उड़द की दाल से बना हुआ भोजन कराएं।
पितरों के निमित्त ब्राह्मण को अन्न वस्त्र दान करें।
डॉ मंजू जोशी ज्योतिषाचार्य

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