मतगणना स्थल के बाहर लगी दुकानों की स्थिति..7000 खर्च कर दुकान लगाई लेकिन सिर्फ तीन पानी की बोतल बिकी.. धंधा नहीं चला तो मायूस होकर समेट ले गए सामान  

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दैनिक अवंतिका उज्जैन।  मतगणना स्थल पर भीड़ नहीं होने की वजह से यहां चाय नाश्ता की दुकान लगाने वालों का भी धंधा चौपट हो गया।मतगणना स्थल के बाहर पूरे दिन सन्नाटा रहा। यहां पर कई लोगों ने चाय नाश्ते की दुकान लगाई थी बताया जाता है मतगणना के 1 दिन पहले ही रात्रि में लोगों ने इंजीनियरिंग कॉलेज के बाहर दुकान लगा ली थी और सोचा था कि मतगणना स्थल के बाहर भारी भीड़ रहेगी ओर सुबह से उनकी दुकानों पर जल्दी ग्राहकी  शुरू हो जाएगी। इसलिए दुकानदारों ने सामान मंगवाकर  खाने पीने के आइटम भी तैयार करने शुरू कर दिए थे। लेकिन सुबह से शाम तक मतगणना स्थल पर यह स्थिति थी कि मतगणना स्थल के बाहर दोनों ही पार्टी के समर्थक नहीं पहुंचे और पूरे दिन मतगणना स्थल पर सन्नाटा पसरा रहा। जिन लोगों ने यहां दुकान लगाई थी वह परेशान होते रहे और दुखी भी हो रहे थे। उनका कहना था कि हमने दो पैसे कमाने के लिए यहां दुकान लगाई थी और दुकान लगाने के लिए पैसा खर्च किया था। लेकिन पूरे दिन सन्नाटा पसरा रहा और इस वजह से दुकानों पर ग्राहक नहीं पहुंचे । मक्सी रोड स्थित प्रेम नगर में रहने वाले प्रीतम सूर्यवंशी ने बताया कि सुबह से 400-500 रुपए का सामान बिका है। दुकान लगाने में जितना पैसा खर्च किया था वह भी नहीं निकला है। इसके अलावा नागझिरी निवासी शिवम पाटीदार ने बताया कि यहां दुकान लगाने के लिए उसने 5000 का सामान खरीदा था उसमें पानी की बोतल सहित अन्य खाद्य सामग्री थी लेकिन मतगणना स्थल पर पूरे दिन सन्नाटा होने की वजह से दुकानों पर ग्राहक नहीं पहुंचे और दुकान नहीं चल पाई। सुबह से शाम में 300 से 400 रुपए का ही सामान बिका है। जो दुकान लगाने के लिए पैसे खर्च किए थे वह भी नहीं निकल पाए हैं। मतगणना स्थल के बाहर चाय नाश्ते की दुकान लगाने वाले एक और दुकानदार मदन सिंह सिसोदिया ने बताया कि दुकान लगाने के लिए टेंट से किराए से बर्तन व कुर्सी टेबल मंगवाए थे तथा 7000 खर्चकर पानी की बोतल व अन्य खाद्य सामग्री मंगवाई थी लेकिन स्थिति यह है कि सुबह से अभी तक सिर्फ तीन पानी की बोतल बिकी है पूरे दिन मतगणना स्थल के बाहर सन्नाटा था जब मदन सिसोदिया ने देखा कि अब शाम हो गई है और ग्रहाकी नहीं  हो रही है तो मायूस होकर तुरंत अपनी दुकान का सामान समेट लिया और दुखी मन से घर की ओर निकल पड़े।

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