क्या कर रहा देवी अहिल्या विश्वविद्यालय …? बिक रहे पेपर, रात 10 बजे ही व्हाट्सएप पर हो जाते हैं वायरल

 

 

ब्रह्मास्त्र इंदौर। एमबीए फर्स्ट सेमेस्टर के पेपर लीक मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पेपर आउट करने के पीछे कालेजों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दो निजी कालेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को पास करवाने के लिए यह कारनामा किया गया है।
एमबीए की डिग्री हासिल करने वाले ये कालेज छात्र-छात्राओं से पहले ही मोटी फीस वसूलते हैं। पेपर के बदले 10-10 हजार रुपये भी लिए जा रहे हैं। पेपर शुरू होने से दस घंटे पहले ही प्रश्न पत्र की कापियां इंटरनेट मीडिया पर रात में वायरल हो जाती है।

विश्वविद्यालय की गोपनीयता पर सवाल

एमबीए फर्स्ट सेमेस्टर के दो पेपर लीक होने के बाद विश्वविद्यालय ने इन्हें निरस्त कर दिया है। 25 मई क्वांटेटिव टेक्नीक और 28 मई को अकाउंट का पेपर आउट हो चुका था। पेपर रात दस बजे वाट्सअप पर विद्यार्थियों को मिल रहा है। राऊ और कनाडिया स्थित कालेजों की तरफ से पेपर आउट होना सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक सील बंद लिफाफे में दो दिन पहले ही पेपर कालेज पहुंच जाते हैं। यहां तक कि संबंधित थाने में इन्हें रखा जाता है।
नियमानुसार सीसीटीवी के सामने केंद्राध्यक्ष और दो प्राध्यापक की मौजूदगी में लिफाफे से पेपर बाहर निकाले जाते हैं। जब थाने में पेपर रखे जाते हैं तो इन्हें परीक्षा शुरू होने से पहले आउट कैसे किया जा रहा है। पूरी गड़बड़ी में थाने और कालेज की सांठगांठ नजर आ रही है।

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