खुसूर-फुसूर मुखिया का कसावट का दौर

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उज्जैन खुसूर-फुसूर

मुखिया का कसावट का दौर

जिले के प्रशासनिक मुखिया ने पदस्थी के बाद अब काफी कुछ समझ लिया है। हर तासीर से वो धीरे-धीरे वाकिफ होते जा रहे हैं। इसी के चलते अब उन्होंने कसावट का दौर आम जन के लिए करने की और कदम बढा दिए हैं। बुधवार को उन्होंने नगर निगम के अभियान को लेकर सिरे से ही नाप जोख कर डाली। एक –एक कर नाली और नाले पर पिछले 25 दिनों के तहत चल रहे अभियान की पोल खोल कर रख दी और हिदायत के साथ निश्चित समयावधि में काम करने का भी आदेश दे दिया। उन्होंने नगर निगम की पुरी परिस्थिति को ही इस दौरान समक्ष लिया । राजस्व की बैठक में उन्होंने अमले की पायदान के आमजन को परेशान करने की स्थिति को भी भांप लिया और मूल मुद्दे पर वार करते हुए चेतावनी भी दे डाली। इससे अमले की पायदान को समझ आ गया है कि काम तो करना पडेगा। मुखिया मूल लोकतंत्र जिसमें जनता ही राजा है उसके पक्ष के काम को अंजाम देते हुए निर्देश जारी कर रहे हैं। गुरूवार को भी मुखिया ने तहसील में जाकर रीडर साब की कार्यप्रणाली को पकडते हुए उन्हें निलंबित करने के निर्देश देकर यह जता दिया कि अब उन्हें जिले के राजस्व अमले की नब्ज टटोल ली है। कहां तंत्र की रोबदारी का कितना खुमार चढा हुआ है उसे उतारने के लिए कौनसी प्रशासनिक टेबलेट नूमा कार्रवाई करना है वो दे दी जाएगी। खुसूर-फुसूर है कि मुखिया के कसावट से परेशान एक लाबी पूरी तरह से सक्रिय हो गई है। मुखिया जी के जनहित के काम उन्हें रास नहीं आ रहे हैं। इसे लेकर मुखिया जी को दबाव में लेने के कुचक्र की तैयारी की जा रही है। दबाव का दम तैयार किया जा रहा है।

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