सीएम के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी उज्जैन की सीट..इसलिए फूंका आखिरी जोर

 

उज्जैन। उज्जैन-आलोट संसदीय सीट सीएम डॉ. मोहन यादव के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी हुई है। यह इसलिए क्योंकि सीएम उज्जैन के ही है और यहां बीजेपी प्रत्याशी अनिल फिरोजिया की जीत सुनिश्चित करने की अधिक जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है। यही कारण है कि वे जब से फिरोजिया को उम्मीदवार बनाया गया है तभी से न केवल उज्जैन पर उनका फोकस है वहीं शुक्रवार की शाम को भी सीएम डॉ. यादव ने रोड शो के माध्यम से चुनाव प्रचार में आखिरी जोर फूंका है। गौरतलब है कि उज्जैन में 13 मई को लोकसभा चुनाव के लिए मतदान है और इसे लेकर न केवल बीजेपी बल्कि कांग्रेस भी पूरा जोर लगा रही है। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने महेश परमार पर दांव खेला है।
बम के ब्लास्ट के बाद और बदल गई स्थिति

यदि मालवा अंचल की बात करें तो कांग्रेस की स्थिति इंदौर में अक्षय कांति बम द्वारा ऐन वक्त पर किए गए ब्लास्ट के बाद और बदल गई है। गौरतलब है कि अक्षय कांति बम कांग्रेस के उम्मीदवार थे और उन्होंने नामांकन वापस लेने के अंतिम दिन ही अपना नामांकन वापस ले लिया था वहीं वे हाथों हाथ बीजेपी में भी शामिल हो गए थे। चूंकि इंदौर के पास ही उज्जैन भी है इसलिए इंदौर में बीते दिनों हुए इस घटनाक्रम का असर उज्जैन में भी देखा जा रहा है। कांग्रेस के ही लोग यह कहते हुए सुने जा सकते है कि यह लोकसभा चुनाव महज औपचारिकता है क्योंकि कार्यकर्ता उत्साह नहीं दिखा रहे है। कांग्रेस सूत्रों की यदि माने तो जीत हार के मामले में बीजेपी का पलड़ा भारी दिखाई दे रहा है लिहाजा जो उत्साह कांग्रेस कार्यकर्ताओं का अपने उम्मीदवार महेश परमार के चुनाव प्रचार में होना चाहिए था वह दिखाई नहीं दिया। इतना ही नहीं यह भी महसूस हुआ कि महेश परमार अपने प्रचार-प्रसार के दौरान अलग-थलग पड़े हुए है क्योंकि जिस तरह से कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को परमार के साथ होना चाहिए था वह सामने नहीं आ रहा है।