शहर के गार्डनों से ट्रेन ऐसे गायब हुई जैसे गधे के सिर से सिंग, ट्रफिक पार्क भी बंद हुआ

दैनिक अवन्तिका उज्जैन। शहर के बच्चे हाईटेक हो गए हैं वे अब मोबाईल पर ही मनोरंजन कर लेते हैं। नगर निगम स्वच्छता और स्मार्ट बनने में लगा है। ऐसे में गार्डनों में बच्चों के लिए चलने वाली ट्रेन कब बंद हो गई किसी को पता भी नहीं चला और किसी ने पता करने का प्रयास भी नहीं किया। इस सब के पीछे यही सोच रही होगी की मामला बच्चों से जुडा है न तो वे वोटर हैं और न उनकी और से कोई आवाज ही उठनी है तो ध्यान क्यों और किस लिए दिया जाए । एक समय था शहर में बच्चों के लिए इतने उद्यान विकसित थे कि बडे और बुजुर्ग भी वहां अपना मनोरंजन एवं समय व्यतीत करने पहुंचते थे। अब गिनती के उद्यान ही बचे हैं जिनमें ऐसे हालात हों की बच्चे मनोरंजन कर सकें और बडे,बुजुर्ग वहां पर अपना समय व्यतीत कर सकें। चंद घडी के सुकुन की स्थिति और स्थल बनाने को लेकर किसी को कोई चाह नहीं है। हाल यह हैं कि जो स्थल पूर्व में थे वे भी अब पूरी तरह से तहस-नहस हो चुके हैं। बच्चों के खेलने के साधन ही नहीं- शहर में बने उघानों से धीरे-धीरे बच्चों के खेलने के साधन गायब हो गए हैं। नए शहर में नगर निगम के टैगौर पार्क, नेहरू पार्क एवं फूड झोन,विशाला का ट्रेफिक पार्क ऐसे थे कि एक समय में यहां शाम के समय बच्चों को लेकर पालक पहुंचते थे। बच्चे खेलने के साधनों पर मजे करते और पालक चंद घडी सुकून की व्यतीत करते थे। आज यहां हालत यह है कि बडे तो ठीक बच्चे अंदर आना ही पसंद नहीं करते हैं। इन उद्यानों से बच्चों के खेलने के साधन धीरे –धीरे गायब हो गए हैं। जो हैं वो भी टूटे फूटे और बिगडी स्थिति में हैं। विशाला उद्यान की ट्रेन कब बंद हो गई किसी को पता नहीं है। यहां का ट्रेफिक पार्क धरातल से ही धीरे से गायब हो गया। ट्रेफिक पार्क के लिए लगे साधन भी धीरे –धीरे गायब हो गए। अब यहां ऐसे बच्चे आते हैं जिन्हें न ट्रेन की आवश्यकता है और न ट्रेफिक पार्क की । यहां लगी ट्रेन को कब जंग लगा किसी को खबर नहीं और उसके पार्टस कैसे गायब हो गए वो भी किसी की जानकारी में नहीं है। क्षीर सागर उद्यान की ट्रेन क्यों बंद है और किसलिए इसे भी किसी ने संज्ञान में लेने की आवश्यकता नहीं माना है।न किसी को चिंता न कोई सवाल- नगर निगम का पूरा ध्यान स्वच्छता और स्मार्ट बनने में लगा हुआ है। बच्चों को लेकर न किसी को चिंता है और नहीं पिछले एक साल में कोई सवाल ही यहां उठा है। नगर निगम प्रशासनिक स्तर पर और न ही जनप्रतिनिधि स्तर पर बच्चों को लेकर कोई भी क्रियाशीलता हाल की स्थिति में सामने नहीं है।-विभिन्न प्रस्तावों को देखकर योजनाएं बनाई जाती हैं। संज्ञान में आने पर अधिकारी संधारण कार्य करवाते हैं। बच्चों के लिए खेलने के साधनों का मुद्दा है तो बहुत से उद्यानों में झूला,चकरी,फिसल पट्टी लगे हैं।-अहमद रईस निजामी,जनसंपर्क अधिकारी, नगर निगम,उज्जैन

Author: Dainik Awantika