April 15, 2024

राम, लक्ष्मण, हनुमान सेना, काल भैरव, माँ कालका, मॉ नवदुर्गा की वेषभूषा में निकले पात्र आकर्षण का केन्द्र रहे

खाचरौद ।  नगर में सावन माह की प्रथम सवारी श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर से धूूमधाम से आरती कर निकाली गई। पुजारी ने भगवान की पूजन अर्चना के बाद पालकी शाही अंदाज में निकली। भगवान नीलकंठ लाल पागड़ी में आकर्षक रूप में सजधज के पालकी में विराजित रहे। पालकी का आकर्षक श्रृंगार विद्युत सज्जा की गई। पालकी शाम 4 बजे मंदिर परिसर से बैण्ड, डीजे, ढोल के साथ राम, लक्ष्मण, हनुमान सेना, काल भैरव , कालका मां, नौ दुर्गा, पुष्पक विमान पर माँ सीता की झांकी, ट्राली पर भगवान महाकाल का पूजन करते हुए रावण, गरूड़ आदि अनेक पात्र आकर्षक वेशभूषा में सजधज के निकले जिन्होंने भक्तों का मन मोह लिया। परंपरानुसार मार्ग से निकली पालकी का चौराहों पर भक्तों ने महाआरती कर प्रसादी वितरण किया। इंद्र देव भी पालकी का स्वागत रिमझीम बरसात से करते रहे जिससे नगर का वातावरण धार्मिक हो गया। स्थान-स्थान पर पालकी दर्शन के लिये ग्रामीण क्षेत्र से भक्तजन आते रहे। पालकी पुराना बस स्टेण्ड से, पुराना थाना, रावला, कस्बा, शिवाजी मार्ग, श्रीराम मंदिर पर हरिहर मिलन के बाद रामोला मंदिर, अनंतनारायण चौराहा, जवाहर मार्ग, चबूतरा चौराहा, कबाड़ीपुरा, गोपाल मंदिर, भोपा कॉलोनी होते हुवे मंदिर परिसर पर पहुंची। श्री नीलकंठ मदिर पर प्रात: से ही दर्शनों का तांता लगा रहा। शाम को भगवान का आकर्षक श्रृंगार किया।
बिछड़ौद
श्रावण माह के सातवें सोमवार को बिछड़ौद में बाबा नीलकंठेश्वर महादेव की सातवीं सवारी बड़ी धूमधाम से निकली। सवारी में बड़ी संख्या में शिव भक्त बाबा की भक्ति और दर्शन-पूजन को लेकर शामिल हुए। सवारी में शिव भक्त झांज- मजीरा बजाते तो झूमते-गाते हुए चलें। वहीं अनेकों शिव भक्त बोल बम के भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए चलें। गांव में सवारी का व्यापारियों और ग्रामीणों ने जगह- जगह पूजन कर सवारी का स्वागत किया। श्री मारुति नंदन सरकार मंदिर स्थित श्री चिंताहरण महादेव का भंग श्रृंगार कर महाआरती कर फरियाली खिचड़ी का आयोजन किया गया। वहीं शिव भक्त और महिलाएं अपनी मन्नतों को लेकर वृत्त भी रखते हैं, तो बाबा नीलकंठेश्वर महादेव भी भक्तों की खुशहाली का ध्यान रखते हुए प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलते हैं।

पालकी में निकले नीलकंठेश्वर महादेव का ऐसा माना जाता है कि जिस तरह भक्त बाबा को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं। उसी तरह बाबा भी अपने भक्तों को भूखा देख खुद भी स्वयं वृत्त रख प्रजा का हाल जानने निकलते हैं। जब तक बाबा हर सोमवार को पालकी में सवार होकर प्रजा का हालचाल जानकर पुन: मंदिर लौटते हैं तब ही बाबा महाकाल भक्तों के साथ व्रत खोलते हैं।