April 20, 2024

 इंदौर ।  एमजीएम मेडिकल कालेज के अधीन चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र में कई सुविधाओं की अभी भी दरकार है, लेकिन जिम्मेदार इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। 38 वर्ष पहले शुरू हुए इस केंद्र में बच्चों के लिए 100 बिस्तरों के इस अस्पताल में अभी तक बाल चिकित्सा गहन देखभाल इकाई (पीआइसीयू) ही नहीं है। इस कारण गंभीर बच्चों को यहां से रैफर करना पड़ता है।
उल्लेखनीय है कि बाल मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए अस्पताल को अपग्रेड करने का प्रस्ताव पांच साल पहले बनाया गया था, लेकिन अभी तक अस्पताल में कोई बदलाव नहीं हुआ। अस्पताल में 14 वर्ष तक के बच्चों का इलाज किया जाता है। यहां सामान्य सर्दी, खांसी, बुखार, डेंगू, सेप्टेसीमिया आदि बीमारियों का इलाज होता है। वर्तमान में हालात यह है कि यहां भर्ती बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ती है तो उन्हें यहां से तीन किलोमीटर दूर स्थित एमटीएच अस्पताल में भेजा जाता है। वहां कई बार बिस्तर ही उपलब्ध नहीं होते हैं। इस कारण गंभीर मरीजों को लेकर स्वजन घंटों अस्पताल के बाहर बैठे नजर आते हैं।
अभी एमटीएच और पीसी सेठी अस्पताल में एनआइसीयू और पीआइसीयू : शहर में 14 वर्ष के कम उम्र के बच्चों की संख्या करीब पांच लाख है, लेकिन उनकी सुविधाओं के लिए शहर में सिर्फ दो ही शासकीय अस्पतालों में एनआइसीयू और पीआइसीयू की सुविधा मिल रही है। वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग के पीसी सेठी अस्पताल और एमजीएम मेडिकल कालेज के एमटीएच अस्पताल में ही यह सुविधा मिल रही है। सभी शासकीय अस्पतालों से गंभीर बच्चों को यहीं रैफर किया जाता है। हाल ही में एमटीएच अस्पताल के एनआइसीयू वार्ड में बिस्तर खाली नहीं होने के कारण एक महिला अपने नवजात को लेकर करीब चार घंटे तक बाहर बैठे रहने को मजबूर थी।कागजों में सीमित पीडियाट्रिक्स सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल
उल्लेखनीय है कि करीब दो वर्ष पहले चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र को पीडियाट्रिक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की तर्ज पर बनाने की योजना बनाई गई थी। लेकिन यह कवायद कभी कागजों से बाहर नहीं आ पाई। जिम्मेदार यह दावा कर रहे थे कि पीडियाट्रिक्स सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल पांच करोड़ टपये की लागत से तैयार होगा। इसके तहत नए वार्ड, एनआइसीयू, पीआइसीयू, थैलेसीमिया, आपरेशन थिएटर, ब्लड बैंक, एक्स-रे सहित अन्य इकाइयां तैयार की जानी थी।