April 19, 2024

 

इंदौर। यह प्रीमैच्योर बेबी जन्म के समय हथेली के आकार की थी। जन्म सिर्फ छह महीने में और वजन केवल 560 ग्राम.. त्वचा इतनी कोमल कि कोई अंगुली ही जोर से फेर दे तो उखड़ जाए..। आंतें व अन्य अंग भी बहुत छोटे और पेपर जैसे थे। कमजोर इतनी कि अपनी मां का दूध भी नहीं पी सकती… इंदौर ने श्रीवास्तव दंपति की ऐसी ही प्रीमैच्योर बेबी को बचा लिया जिसे मेडिकल विशेषज्ञ भी ‘कुदरत का करिश्मा’ मान रहे हैं। माता-पिता भी इसे ईश्वर का आशीर्वाद मान रहे हैं क्योंकि उन्होंने संतान की चाह में न जाने कितने ही मंदिरों में मत्था टेका था।
डॉक्टर शैफाली जैन और उनकी टीम के साथ ही यह उस दंपति का भी कड़ा संघर्ष है, जिसके यहां 12 साल बाद किलकारी गूंजी। ​​​​​​मां ने 10 से 12 घंटे तक अस्पताल में बच्ची को छाती से लगाकर रखा। पिता ने भी पत्नी की मदद करते हुए यही किया।डॉक्टरों के मुताबिक यह मध्यप्रदेश का सबसे प्रीमैच्योर बेबी है। इतनी नाजुक बच्ची को 95 दिन तक एनआईसीयू में रखा गया। वह अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसे डिस्चार्ज कर दिया गया है।