अंगदान दिवस पर एक ही ग्रामीण परिवार से भरे गए 7 प्रपत्र देहदान

 

महिदपुर। 27 नवंबर को राष्ट्रीय अंगदान दिवस मनाया जाता है।यह दिवस इसलिए मनाया जाता है कि इस दिवस से प्रेरित होकर जनसामान्य अपने रक्तदान, अंगदान,नेत्रदान और देहदान का संकल्प लेकर उत्पीड़ित मानवता की सेवा में अपना पूर्ण योगदान दे सकें।ये सभी दान उत्कृष्ट श्रेणी के दानों में समाविष्ट है क्योंकि इससे मृत्यु के आगोश में जा रहे व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है।मरने के बाद तो यूं भी पार्थिव देह का अग्नि संस्कार कर दिया जाता है या जमीन में गाड़ दिया जाता है।उससे किसी का कुछ भला नहीं होता पर इन दानों से मौत के बाहुपाश के शिकंजे में असमय जकड़े जाने से व्यक्ति को बचाया जा सकता है।समाचार सृजनकर्ता के परिवार में भी युवा पुत्र विश्वास डोसी के फरवरी 2016 में इंदौर में पांचवा ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अंगदान का मसला प्रचारित हो जाने के बाद आज उस खबर की पुनरावृत्ति की जाने पर एवं सुप्रसिद्ध कलमकार कीर्ति राणा की कलम से रचित -पंचमेल- के अंतर्गत ‘मरकर भी जिंदा रहने का अंदाज’ का प्रेषण करने के बाद मध्यप्रदेश जिपलेप संवाद ग्रुप के एडमिन प्रीतम लखवाल ने अंगदान के प्रति अपनी भावना प्रदर्शित की।ज्ञातव्य है कि तत्समय मुस्कान ग्रुप के संदीपन आर्य,जीतू बगानी, तत्कालीन संभागायुक्त संजय दुबे एवं मेडिकल कॉलज के डीन संजय मित्तल के सद्प्रयासों से यह काम मूर्तरूप ले सका था।तकरीबन 1 वर्ष पहले रणायरापीर ग्राम के ऊंकारलाल ने भी देहदान के प्रति अपनी भावना प्रदर्शित की थी।तत्समय इस कलमकार ने उनसे संकल्प पत्र भरवाया था और आर डी गार्ड़ी चिकित्सा महाविद्यालय में रजिस्ट्रेशन पंजीकरण 19/ 2022 के अंतर्गत उनका पंजीकरण हो चुका है।इन मामलों में गीता भवन न्यास समिति बड़नगर के डॉ.जी.एल.ददरवाल का भी टीम सहित पूर्णरूपेण योगदान रहा है।ज्ञातव्य है कि चिकित्सा शिक्षा में पढ़ने वालों को समुचित संख्या से बहुत कम पार्थिव देह सीखने/परीक्षण के लिए मिलती है।इस शिक्षा को प्राप्त करके ही वे अन्य लोगों का जीवन बचाने के प्रयास करते हैं।अब रणायरापीर के स्व.डॉ.रमेशचंद्र पंवार के परिवार के चार बेटों,दो बहुओं एवं उनकी स्वयं की धर्मपत्नी कुल मिलाकर एक ही परिवार के 7 लोगों ने देहदान का संकल्प पत्र भरकर हस्तगत करवाया है। माता कमलाबाई,पंकज पंवार एवं उनकी धर्मपत्नी सीमा पंवार,सोनू पंवार एवं उनकी धर्मपत्नी निशा पंवार, राकेश,ललित पंवार नाम के दो बेटों ने ऊंकारलालजी की प्रेरणा से देहदान के प्रपत्र भरकर प्रेषित किए हैं।पंवार परिजनों का कहना है कि हमारा शरीर एक दिन जलकर राख होना है,यह दुनिया का हर एक व्यक्ति जानता है। लेकिन उसी शरीर से किसी को अगर जीवनदान मिल जाए तो इससे बड़ा शुभ कर्म और क्या हो सकता है? इसलिए सबसे बड़ा दान देहखदान जो हमने किया और भी करें।आपका शरीर किसी के काम आ जाए तो समझो कि हमारी जिंदगी जीना सार्थक हो गया।