एक रेमडेसिविर इंजेक्शन के मांगे 20 हजार रुपए, तीन आरोपी गिरफ्तार

इंदौर
एसटीएफ इंदौर ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से 12 रेमडेसिविर इंजेक्शन मिले हैं। ये कोरोना पीड़ितों के परिजनों से 20 हजार रुपए प्रति इंजेक्शन के हिसाब से वसूलने वाले थे। पुलिस ने आरक्षक को ग्राहक बनाकर भेजा और एडवांस में रुपए देकर मामले का खुलासा किया। गिरोह में एक मेडिकल संचालक को भी गिरफ्तार किया गया है।
एसटीएफ एसपी मनीष खत्री ने बताया कि 14 अप्रैल को सूचना मिली थी कि राजेश पाटीदार और ज्ञानेश्वर बारसकर नामक व्यक्ति चिड़ियाघर के पास रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने आने वाले हैं। इस पर उप पुलिस अधीक्षक सोनू कुर्मी के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई। आरक्षक विवेक द्विवेदी को कोरोना मरीज का परिजन बनाकर संदेहियों से इंजेक्शन खरीदने के लिए चिड़िया घर के सामने भेजा गया। यहां पर दोनों काले रंग की बाइक क्रमांक एमपी 09 एमक्यू 0177 से पहुंचे। उन्होंने बताया, उनके पास 6 रेमडेसिविर इंजेक्शन हैं। प्रति इंजेक्शन वे 20,000 रुपए लेंगे। इस पर आरक्षक विवेक ने बातचीत के बाद इंजेक्शन खरीदने के लिए एडवांस में रुपए दे दिए। रुपए मिलने के बाद उन्होंने विवेक को इंजेक्शन दिखाया। इंजेक्शन देखते ही विवेक ने टीम को इशारा कर दिया। टीम ने घेराबंदी कर दोनों को पकड़ा और तलाशी ली तो उनके पास से 6 रेमडेसिविर इंजेक्शन मिले। टीम ने आरोपियों को दिए एडवांस के रुपए, बाइक जब्त कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उन्होंने बताया कि विजय नगर स्थित राज मेडिकल से उन्होंने रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीदे थे। इस पर टीम राज मेडिकल स्टोर पर पहुंची और रेड मारकर मेडिकल संचालक अनुराग सिंह सिसोदिया के पास से 6 नग रेमडेसिविर इंजेक्शन बरामद किए। उन्होंने रेमडेसिविर इंजेक्शन के स्टाक संधारण और बिल के बारे में पूछताछ की तो वे कोई उचित जवाब नहीं दे पाए। इस पर टीम ने इंजेक्शन जब्त कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला है कि आरोपी राजेश पाटीदार पूर्व में सिपला कंपनी में एमआर का काम करता था। पिछले 5 साल से अलबट्रो कंपनी में बतौर एमआर का काम कर रहा था। इस दौरान उसकी पहचान राज मेडिकल के संचालक अनुराग से हुई। उसने यहां से रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीदकर धार जिले में लोगों को उपलब्ध कराए थे। राज मेडिकल के संचालक ने पूछताछ में अन्य कई मेडिकल स्टोर्स पर भी रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी की बात बताई है। पुलिस को मामले में बड़े खुलासे की उम्मीद है।

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