उज्जैन। अभी विवाहों के बैंड-बाजा और डीजे के शोर का दौर चल रहा है। इसी दरमियान माध्यमिक शिक्षा मंडल की परीक्षाओं का दौर भी शुरू हो गया है। मंगलवार को हायर सेकेंडरी का अंग्रेजी का प्रश्न पत्र के एक दिन पहले जमकर शादियों की धूम रही और खूब शोर का दौर रहा। फरवरी माह के अंतिम सप्ताह में इस शोर से परीक्षार्थियों को धर्मागत रूप से होलाष्टक राहत देने वाला है। पूरे आठ दिन बैंड-बाजा और डीजे पर स्वत: ही रोक लग जाएगी। यही नहीं विवाहों के मुहूर्त न होने से कुल 14 दिन परीक्षार्थियों को राहत मिलने वाली है।
धर्म की मान्यता अनुसार होलिका दहन से आठ दिन पहले लगने वाला होलाष्टक 24 फरवरी से 3 मार्च तक रहेगा। इन आठ दिनों में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, वाहन व मकान की खरीद-बिक्री जैसे सभी शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे हैं। होलाष्टक फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से प्रारम्भ होकर पूर्णिमा तक चलता है। हालांकि यह समय देवी-देवताओं की आराधना, जप, तप और दान-पुण्य के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। ऐसे में होलाष्टक के आठ दिन बैंड-बाजा और डीजे का उपयोग भी नहीं होना है। जानकारों के अनुसार विवाहों के मुहुर्त 21 फरवरी के बाद सीधे 6 मार्च को सामने आ रहे हैं। ऐसे में परीक्षार्थियों को होलाष्टक के साथ ही अन्य 6 दिन भी शोर के दौर से राहत मिलेगी।
21 फरवरी के बाद 6 मार्च से मुहुर्त-
पंडित प्रणयन पाठक बताते हैं कि फरवरी में विवाह के मुहुर्त 21 फरवरी तक हैं । इसके बाद मुहुर्त सीधे 6 मार्च को हैं। होलाष्टक 24 फरवरी से 3 मार्च तक रहेगा। होलाष्टक अवधि में सभी प्रकार के शुभ कार्य निषेध माने गए हैं। होलाष्टक के दौरान किए गए शुभ कार्य फलदायी नहीं माने जाते, इसलिए इन्हें टालना ही श्रेयस्कर कहा गया है। इन पाबंदियों के उलट होलाष्टक का समय आध्यात्मिक उन्नति के लिए विशेष माना गया है। इस अवधि में भगवान शिव, विष्णु और हनुमानजी की पूजा, महामृत्युंजय मंत्र जाप, भगवत भजन और कीर्तन के साथ दान-पुण्य और सेवा कार्य करना श्रेष्ठ है।
इस कारण से होलाष्टक की मान्यता-
होलाष्टक का समय ग्रहों की ऊर्जा को अस्थिर और उग्र मानता है। इस समय ग्रहों की स्थिति ऐसी होती है, जिससे किसी भी शुभ कार्य में विघ्न उत्पन्न हो सकते हैं। इससे कार्य की सफलता में विघ्न और रुकावटें आ सकती हैं। यही कारण है कि इस दौरान शुभ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है।