मौतों-मुआवजे को लेकर अजब-गजब भागीरथपुरा हादसा, 33 मौतें, जिसे माना, उसे मदद; जिसे न माना, उसे कुछ नहीं

13 परिवारों का सवाल- हमारा क्या कसूर

ब्रह्मास्त्र इंदौर

इंदौर में भागीरथपुरा में दूषित पानी से अब तक 33 मौतें हो चुकी हैं। खास बात यह कि शासन अब तक 21 मौतें स्वीकार चुका है, जबकि 22वीं मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग किसी भी मौत को नहीं मान रहा है। यहां तक कि कुछ मौतों के मामलों में तो बकायदा खंडन किया है कि मृतक व्यक्ति या महिला की मौत दूसरी बीमारी (कोमार्बिड) के कारण हुई है।

खास बात यह कि किसी परिवार में एक नहीं बल्कि दो मौतें भी हुई हैं। अब तक 21 जो मौतें मानी गई है, उनमें से 20 मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी गई है। वह भी शासन की ओर से नहीं बल्कि रेडक्रॉस सोसायटी से यानि दानदाताओं की राशि से। ऐसे में अब बाकी 13 परिवारों का सरकार से सवाल है कि आखिर हमारा कसूर क्या है। हमारे परिवार का व्यक्ति तो उल्टी-दस्त के कारण एडमिट हो गया था फिर हालत बिगड़ने पर मौत हुई है।

गुरुवार रात बुजुर्ग अलगूराम यादव की अरबिंदो हॉस्पिटल में मौत हो गई थी । उन्हें उल्टी-दस्त के कारण 9 जनवरी को एडमिट किया गया था और करीब एक माह बाद मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग ने सफाई दी है कि वे पूर्व से ही लकवे के मरीज थे और दायी जांघ की हड्डी में भी फैक्चर हो गया था। साथ ही अन्य बीमारियां भी थी। जबकि बेटे संजय यादव का कहना है कि पिता 8 जनवरी तक अच्छे थे। दुखद यह कि एक माह पहले उनकी पत्नी उर्मिला की भी मौत उल्टी-दस्त के बाद हुई थी। इसेक लिए परिवार रेडक्रॉस सोसायटी से 2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी गई थी।

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