लोकसभा चुनाव के परिणाम पटवारी और सिंगार का करेंगे भविष्य तय

 

 

4 जून के बाद सभी तस्वीर होगी साफ, कांग्रेस का कठिन समय बरकरार

 

इंदौर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का पद बरकरार रहना इस बात पर निर्भर करता है कि कांग्रेस को मध्य प्रदेश में कितनी सीटें मिलती हैं। यदि कांग्रेस को प्रदेश में दो या दो से अधिक सीटें मिली तो जीतू पटवारी का पद कम से कम 3 साल के लिए सुरक्षित हो जाएगा, लेकिन यदि कांग्रेस का मध्य प्रदेश में सफाया हुआ या उसे केवल एक ही सीट मिली तो जीतू पटवारी को पीसीसी चलाने में दिक्कत आएगी। क्योंकि यदि कांग्रेस केवल छिंदवाड़ा में जीतती है तो उसका श्रेय जीतू पटवारी को नहीं मिलेगा। छिंदवाड़ा की जीत का श्रेय केवल कमलनाथ को जाएगा।
वैसे भी छिंदवाड़ा में कमलनाथ ने अन्य किसी कांग्रेसी नेता का हस्तक्षेप होने नहीं दिया था। इसी तरह धार संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस को हार मिलती है तो इसका नुकसान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार को होगा। यानी जीतू पटवारी और उमंग सिंघार का राजनीतिक भविष्य कांग्रेस की चुनावी सफलता पर निर्भर करेगा।
धार संसदीय सीट पर इस बार कांग्रेस ने साफ सुथरी छवि के शिक्षित युवा राधेश्याम मुवेल को प्रत्याशी बनाया था। धार संसदीय क्षेत्र की 8 में से 5 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कुक्षी, मनावर, सरदारपुर, गंधवानी और बदनावर की सीटें जीती हैं।
इनमें बदनावर को छोड़कर शेष चारों सीटें आदिवासी हैं। जबकि भाजपा को धार संसदीय क्षेत्रमें धरमपुरी, महू और धार सीट जीतने में सफलता प्राप्त हुई है। इनमें केवल धरमपुरी की सीट ही आदिवासी है। यानी विधानसभा चुनाव के आधार पर देखा जाए तो कांग्रेस धार संसदीय क्षेत्र में काफी आगे है लेकिन वास्तव में ऐसा है नहीं।
धार के मतदाता लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दों पर मतदान करते हैं, जिसका फायदा भाजपा को मिलता है। इसके अलावा धार संसदीय क्षेत्र की धार, बदनावर और महू यह तीनों सामान्य सीटें कांग्रेस को भारी पड़ती है। पिछली बार लोकसभा चुनाव में महू से 60,000, बदनावर से 40 हजार और धार विधानसभा सीट से भाजपा को लगभग 70,000 मतों की बढ़त मिली थी।
इस बढ़त को कांग्रेस पाट नहीं पाई थी। इस बार महू के सभी बड़े कांग्रेसी भाजपा में है। दो बार के विधायक अंतर सिंह दरबार और 2023 में कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़े रामकिशोर शुक्ला भाजपा के पाले में हैं। इसलिए अनुमान है कि केवल महू से ही भाजपा 90 हजार से 1 लाख तक की लीड लेने की स्थिति में है। जाहिर है विधानसभा चुनाव के आधार पर भले ही कांग्रेस मजबूत दिख रही हो लेकिन लोकसभा चुनाव में समीकरण पूरी तरह से भाजपा के पक्ष में हैं। इसलिए सभी को उत्सुकता है कि 4 जून को धार में क्या होने वाला है।

उमंग और जीतू में मतभेद कायम —
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बीच गंभीर राजनीतिक मतभेद अभी भी कायम है। दोनों नेता एक मंच पर बहुत कम नजर आते हैं। दोनों के बीच टिकट वितरण के समय मतभेद हो गए थे।
खासतौर और मुरैना की टिकट को लेकर उमंग सिंघार अड़ गए थे। इसी तरह धार संसदीय क्षेत्र में जीतू पटवारी महेश कन्नौज या हीरालाल अलावा को टिकट देना चाहते थे जिससे कांग्रेस को जयस का पूरा साथ मिले लेकिन उमंग सिंघार ने राधेश्याम मुवेल को टिकट दिलवा दिया। डॉ हीरालाल अलावा और राधेश्याम मुवेल के बीच राजनीतिक मतभेद हैं।
इसके चलते डॉक्टर हीरालाल अलावा ने लोकसभा चुनाव में पूरी क्षमता से काम नहीं किया। सूत्रों का कहना है कि चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस में आरोप और प्रत्यारोप का नया दौर शुरू होने वाला।

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