“हस्त मुद्रा, ध्यान व प्राणायाम चिकित्सा” विषय पर आयोजित हुआ शिविर

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ध्यान और प्राणायाम परंपरा नहीं विज्ञान

उज्जैन। ध्यान, प्राणायाम और मुद्रा के माध्यम से स्वस्थ रहा जा सकता है। ये सभी वैज्ञानिक उपाय हैं, जिनसे लोग अपने जीवन में स्वस्थ रहकर दीर्घायु बन सकते हैं। ये बातें हस्त मुद्रा, ध्यान व प्राणायाम चिकित्सा” विषय पर आयोजित दस दिवसीय निःशुल्क शिविर में बताई गईं।

वर्तमान में कई बीमारियां लोगों को घेर रही हैं। इनसे बचने के लिए लायंस क्लब ‘सुरभि’ और विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन (मप्र) के योग केंद्र, दर्शनर्शास्त्र अध्ययनशाला के तत्वावधान में “हस्त मुद्रा, ध्यान व प्राणायाम चिकित्सा” विषय पर दस दिवसीय निःशुल्क शिविर का आयोजन डॉ. नागर मल्टी स्पेशलिटी व ऑर्थोकेयर क्लिनिक, वेद नगर, उज्जैन पर किया गया।

शिविर का आयोजन विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में एमए योग के द्वितीय सेमेस्टर के विद्यार्थी सीमा राजेश नागर, तृप्ति वाघमारे, डॉ. कृपाल सिंह पंवार, डॉ. राहुल नागर ने योग केंद्र, दर्शनर्शास्त्र अध्ययनशाला के विभाध्यक्ष डॉ. मिश्र एवं योगाचार्य डॉ. बिन्दु सिंह पंवार, सहायक अध्यापिका विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के मार्गदर्शन में किया। शिविर में ध्यान और प्राणायाम के सरल और उपयोगी उपाय बताए गए।

डॉ. राहुल नागर ने बताया हस्तमुद्रा और ध्यान केवल हमारी प्राचीन परम्परा ही नहीं बल्कि विज्ञान सम्मत हैं। इनको अपनाकर हम स्वस्थ रह सकते हैं। वर्तमान में हार्ट अटैक जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं और चिकित्सा विज्ञान भी कई बीमारियों पर नियन्त्रण नहीं कर पा रहा। हस्तमुद्रा, प्राणायाम और ध्यान के माध्यम से इन समस्याओं का निदान किया जा सकता है। इसलिए ध्यान और प्राणायाम अपनाओ और स्वस्थ रहो।

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