33 मौतों के बाद थमा एडमिट होने का सिलसिला, अब एक मरीज ही भर्ती

भागीरथपुरा दूषित पानी की जांच के लिए आयोग गठित

ब्रह्मास्त्र इंदौर

इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पानी के मामले में 33 लोगों की मौत के बाद अब मरीजों के एडमिट होने का सिलसिला लगभग थम गया है। अब सिर्फ एक 57 वर्षीय महिला ही एडमिट है। वह गंभीर जीबीएस (गुइलेन बैरे सिंड्रोम) से जूझ रही हैं। हालांकि इस मरीज को जीबीएस होने का स्वास्थ्य विभाग खंडन कर चुका है, लेकिन परिजन का कहना है कि महिला इसी बीमारी के कारण ऌऊव (ऌ्रॅँ ऊीस्रील्लीिल्लू८ वल्ल्र३) में एडमिट है।

दरअसल दूषित पानी के कारण इस महिला की हालत 28 दिसंबर को बिगड़ी थी। इस पर पहले उसे एक प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। इसके बाद उन्हें 2 जनवरी को दूसरे बड़े हॉस्पिटल में रैफर किया गया। इस तरह करीब डेढ़ माह से उनका इलाज चल रहा है। इस बीच हालत गंभीर होने पर 20 दिन से ज्यादा समय तक वह आईसीयू, वेंटिलेटर पर भी एडमिट रहीं। परिजन के मुताबिक, अभी उन्हें ठीक होने में समय लगेगा। जीबीएस एक दुर्लभ और गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपनी ही स्वस्थ तंत्रिकाओं पर हमला करने लगती है। इसका एक कारण गंदे पानी में पनपने वाला कैम्पीलोबैक्टर जेजुनी बैक्टीरिया भी है। बीमारी के तहत हाथ-पैरों में झुनझुनी और सुन्नपन होता है। यह गैस्ट्रोएंटेराइटिस (पेट का इंफेक्शन) देखने में आता है। इसमें मरीज को ठीक होने में समय लगता है। इसमें 70% मरीज स्वस्थ हो पाते हैं।

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