खुसूर-फुसूर पूरी सडक पर जश्न… सडकों पर जमकर बैंड बज रहा है… बारात के आगे – आगे डीजे का माडिफाईड वाहन सडक को पूरा कवर करके चल रहा है

खुसूर-फुसूर

पूरी सडक पर जश्न…

सडकों पर जमकर बैंड बज रहा है… बारात के आगे – आगे डीजे का माडिफाईड वाहन सडक को पूरा कवर करके चल रहा है। पीछे –पीछे जाम लग रहा है और वाहन चालक कसमसा रहे हैं। पीछे बैठी महिला सवारी और आगे बैठा बच्चा डीजे की अंधाधुध आवाज में दिल बैठाने वाली आवाज को सहन कर रहे हैं। कान अंदर से चिल्ला रहे हैं अब फटू या तब फटू। संवेदनशीलता किसी में नजर नहीं आ रही है। नाचने वाले अपनी मस्ती में मस्त हैं और डीजे वाला उन्हें नचाने में। शहर में अमूमन पिछले दो दिनों में शाम से रात तक यही आलम देखने को मिला है। शुक्रवार रात को नए शहर के फ्रीगंज में तो पूरी सडक पर ही टेंट तंबू तना हुआ रहा। आवागमन करने वाले मुहाने पर पहुंचकर मार्ग बदलते रहे। अनुमति के नाम पर बस कागज जारी हो रहा है। न तो इसकी निगरानी की जा रही है और न ही अनुमति की शर्तों का पालन ही कहीं देखने में आ रहा है। सब कुछ मनमानी पर चल रहा है। कानून –कायदे ,नियम सब कुछ हवा हो गए हैं। खुसूर-फुसूर है कि एक समय था जब शहर में बारातों एवं बैंड को लेकर नियम जारी किए गए थे। सडक के फूटपाथ पर ही निकाला जाए। सडक अगर पूरी जाम मिली या दिखी तो ऐसे में बैंड वर्दी केंद्र पर जमा हो जाएगा। अनुमति तत्काल निरस्त कर दी जाएगी। तत्कालीन अधिकारियों ने बोला ही नहीं करके भी दिखाया । बाद में बहुत अधिक दबाव आया तो आधी सडक तक ही बारात ओर बैंड निकालने पर स्वीकृति दी । उसमें भी शर्तों के तहत आयोजनकर्ता एवं बैंड पार्टी को बाध्य कर दिया गया। ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर भी लगाम लगाई गई। हालिया स्थिति में सब कुछ गौण होता नजर आ रहा है। विवाह मुहूर्त दिवसों पर आमजन बेचारा कसमसा रहा है। डीजे वाला भैया इतने डेसीबल पर गाना बजा रहा है कि नाचने वाला ही थर्रा रहा है। डीजे में लगे साउंड सिस्टम बजने के दौरान ऐसे कांपते है जैसे बर्फ बारी के बीच किसी को नग्न खडा कर दिया गया हो।

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