26 मामलों के आरोपी पूर्व पार्षद अनवर कादरी को हाईकोर्ट से जमानत

ब्रह्मास्त्र इंदौर

लव जिहाद के लिए फंडिंग करने और एक दर्जन से ज्यादा आपराधिक मामलों के आरोपी वार्ड-58 से कांग्रेस पार्षद रहे अनवर कादरी को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। जिला कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद कादरी ने हाईकोर्ट में अपील की थी, जिसे बुधवार 4 फरवरी को मंजूर कर लिया गया। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की बेंच ने सुनवाई के बाद याचिका स्वीकार की है। हालांकि जमानत का औपचारिक आदेश आना अभी बाकी है।

लव जिहाद केस में फंडिंग का आरोप- यह मामला बाणगंगा थाना क्षेत्र का है। जून 2025 में एक युवती ने साहिल शेख और अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। युवती का आरोप था कि साहिल ने प्रेम जाल में फंसाकर उसका शारीरिक शोषण किया और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया। बुर्का पहनने के लिए भी मजबूर किया गया। जांच के दौरान साहिल शेख ने बयान दिया कि इस तरह के मामलों के लिए अनवर कादरी के जरिए दो लाख रुपए की फंडिंग की जाती थी। इसके बाद पुलिस ने कादरी को मुख्य आरोपी बनाते हुए विभिन्न गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया। केस दर्ज होने के बाद अनवर कादरी फरार हो गया था। लंबे समय बाद उसने कोर्ट में सरेंडर किया, जिसके बाद से वह जेल में बंद था।

आपराधिक मामलों का रिकॉर्ड- अनवर कादरी पर एक-दो नहीं, बल्कि एक दर्जन से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें डकैती सहित कई गंभीर अपराध शामिल हैं। डकैती के मामलों के चलते ही उसकी पहचान अनवर डकैत के नाम से बनी।

पार्षदी भी गई, चुनाव लड़ने पर रोक- लव जिहाद केस सामने आने के बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने संभागायुक्त को पत्र लिखकर कादरी की पार्षदी समाप्त करने की सिफारिश की थी। इसके बाद निगम परिषद में प्रस्ताव पास कर उसकी पार्षदी खत्म की गई। संभागायुक्त डॉ. सुदाम पी. खाड़े ने भी कादरी को पार्षद पद से हटाते हुए चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था।
जिला कोर्ट ने क्यों खारिज की थी जमानत- अनवर कादरी ने पहले जिला कोर्ट में जमानत याचिका लगाई थी, जिसे 10 दिसंबर 2025 को खारिज कर दिया गया था। कादरी का तर्क था कि सह-आरोपी साहिल और अन्य को हाईकोर्ट व जिला कोर्ट से जमानत मिल चुकी है, इसलिए उसे भी राहत दी जाए। इस पर जिला कोर्ट ने कहा था कि कादरी पर फंडिंग के आरोप हैं, वह मुख्य आरोपी है, इसलिए जमानत नहीं दी जा सकती।

Share:

संबंधित समाचार

Leave a Comment