न ताजिए निकले, न जुलूस और न ही अखाड़े, फिर भी प्रशासन रहा टेंशन में: खुद ही किए ताजिए ठंडे, अब ली राहत की सांस

ब्रह्मास्त्र इन्दौर। मोहर्रम पर न तो ताजिए निकलने थे और न ही जुलूस , फिर भी प्रशासन टेंशन में था। इंदौर – उज्जैन में मोहर्रम के ठीक पहले पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगने के बाद पुलिस प्रशासन बेहद सतर्क रहा। हालात लगातार ऐसे बनते जा रहे थे कि कहीं से कुछ भी हो सकता है, लेकिन प्रशासन की मुस्तैदी से सब ठीक ठाक रहा। अलबत्ता यह बात जरूर रहेगी पुलिस बल को लगातार चौकसी करनी पड़ी। इस बार तो ताजिए ठंडे करने के लिए खुद प्रशासन के अधिकारियों को ही मशक्कत करनी पड़ी है। बहरहाल अब जाकर प्रशासन ने राहत की सांस ली है। गौरतलब है कि कोरोना काल में सभी धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर जारी किए गए प्रतिबंध के तहत इस बार न तो ताजिए निकले और न ही जुलूस या अखाड़े नजर आए।
प्रतिबंधों को लेकर गंभीर हुआ प्रशासन देर रात तक मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में डटा रहा, वहीं कर्बला मैदान को भी सील कर दिया गया। इस बार मोहर्रम पर प्रशासन स्वयं स्थान चिह्नित कर ताजिए ठंडे कर रहा है।
मुस्लिम समाज के मोहर्रम पर समाज में उत्साह रहा। प्रशासनिक अधिकारियों की टीम भी सुरक्षा की दृष्टि से मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में तैनात है। शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्र देपालपुर , बेटमा और गौतमपुरा में देर रात तक अधिकारियों की टीम डटी रहने के बाद कल सुबह से फिर तैनात हो गई थी। देपालपुर के एसडीएम रविसिंह ने बताया कि जुलूस निकालने पर प्रतिबंध लगाया गया है। प्रशासन की टीम खुद चिह्नित स्थानों पर ताजिए ठंडे कर रही है। देपालपुर में 30, बेटमा तथा गौतमपुरा में 2 दर्जन से अधिक ताजिए ठंडे करने के लिए पांच स्थान चिह्नित किए गए । प्रशासन की गाड़ी ने जाकर छोटे-छोटे ताजिए ठंडे किए। लोगों से अपील की गई कि शांति और सौहार्द के साथ त्योहार मनाएं। इसी प्रकार महू, सांवेर एवं हातोद क्षेत्र में भी देर रात तक प्रशासन व पुलिस की टीम डटी रहने के बाद सुबह से फिर से मोर्चा संभाले रही। इन इलाकों में भी चिह्नित स्थानों पर प्रशासन की टीम खुद ताजिए ठंडे किए।

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