उज्जैन । शिव नवरात्र के दुसरे दिन भगवान श्री महाकालेश्वर को मुकुट,मुण्ड माला, नाग कुंडल एवं फलों की माला के दिव्य श्रृंगार किया गया। भगवान के दिव्य दर्शन इस दौरान श्रृद्धालुओं ने किए हैं। श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिवनवरात्रि का उत्सव बड़ी धूम-धाम व उल्हास के साथ मनाया जा रहा है।
शिव नवरात्रि के दूसरे दिन संध्या पूजन के पश्चात भगवान श्री महाकालेश्वर ने दिव्य रूप में भक्तों को दर्शन दिये। भगवान श्री महाकालेश्वर को के नवीन वस्त्र के साथ मेखला, दुप्पटा, मुकुट, मुंड-माला, छत्र आदि से सुसज्जित कर भगवान जी का भांग, चंदन व सूखे मेंवे से श्रृंगार किया गया। साथ ही भगवान श्री महाकालेश्वर को मुकुट, मुण्ड माला, नागकुंडल एवं फलों की माला के साथ दिव्य श्रृंगार किया गया । रविवार 8 फरवरी को श्री महाकालेश्वर भगवान का चन्दन व भांग का श्रृंगार कर बाबा को शेषनाग धारण करवाया जायेगा।
सुबह 8 बजे से पूजन का क्रम शुरू-
शिव नवरात्रि महोत्सव के दूसरे दिवस का प्रारम्भ श्री महाकालेश्वर मंदिर कोटितीर्थ कुण्ड पर प्रातः 08 बजे से श्री गणेश पूजन व श्री कोटेश्वर महादेव भगवान का पूजन-अभिषेक-आरती के साथ हुआ। श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी घनश्याम शर्मा के आचार्यत्व में 11 ब्राम्हाणों द्वारा श्री महाकालेश्वर भगवान जी का अभिषेक एकादश-एकादशनी रूद्रपाठ से किया गया । पूजन का यह क्रम 14 फरवरी तक प्रतिदिन चलेगा । अपराह्न में 3 बजे संध्या काल पंचामृत पूजन के पश्चात श्री महाकालेश्वर भगवान का दिव्य श्रृंगार किया गया।
शिवकथा,हरिकीर्तन निरंतर-
शनिवार को दुसरे दिन श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा शिव कथा, हरि कीर्तन का आयोजन अपराह् 04:30 से 06:00 बजे तक मन्दिर परिसर में नवग्रह मन्दिर के पास के चबूतरे पर किया गया। आयुर्वेदाचार्य डा. अजय अपामार्जने एवं तबला वादन में उनके साथी ’ श्रीधर व्यास द्वारा परमात्मा की प्राप्ती का सर्वश्रेष्ठ मार्ग भक्ति है यह सीख हमें नारद महाराज ने दी है, उनके द्वारा बताया की भक्ति नौ प्रकार की होती है, जैसे श्रवण भक्ति, कीर्तन भक्ति, स्मरण भक्ति, पादसेवन भक्ति, अर्चन भक्ति, वंदन भक्ति, दास्य भक्ति, शरण्य भक्ति, आत्मनिवेदन भक्ति आदि नव विद्या भक्ति का विवेचन दिया गया