खुसूर-फुसूर कंचन बाई का ‘ दाधिची ’ कर्म अंधेरे में अजीब भूमि हो गई है ये जहां अंगुली कटाकर लोग शहीद का दर्जा पा रहे हैं

खुसूर-फुसूर

कंचन बाई का ‘ दाधिची ’ कर्म अंधेरे में

अजीब भूमि हो गई है ये जहां अंगुली कटाकर लोग शहीद का दर्जा पा रहे हैं और जो समाज के लिए सर कलम करवा रहे हैं उनका जिक्र तक नहीं हो रहा है। हाल ही में पडोसी प्रदेश से जुडे संभाग के नीमच जिले के मडावदा पंचायत क्षेत्र के आंगनवाडी केंद्र में स्व सहायता समूह की अध्यक्ष बहन ने अपनी जान देकर केंद्र में आए 20 बच्चों को जीवनदान दिया है। मामला तीन दिन पुराना है। न मिडिया ने इसे विशेष स्थान दिया और न ही शासन प्रशासन ने ही इसे उचित सम्मान दिया। सामने आ रहे घटनाक्रम अनुसार आंगनबाड़ी केंद्र पर मधुमक्खियों ने हमला किया तो स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष कंचन बाई ने अपनी जान देकर केंद्र आए और वहां बाहर खेल रहे मासूम बच्चों को बचा लिया। इस तरह नीमच जिले की कंचन बाई मेघवाल इंसानियत के प्रति कर्त्तव्य और इसके लिए समर्पण व साहस का उदाहरण बन गई । देर से सामने आये घटनाक्रम अनुसार नीमच के पास सोमवार को सुबह आंगनबाड़ी केंद्र पर कई बच्चे मौजूद थे। केंद्र की सहायिका बाकी बच्चों को लेने गई हुई थी। इसी बीच बच्चों पर बाहर से झुंड के रूप में आईं मधुमक्खियों ने हमला कर दिया। पास में ही स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष 45 वर्षीय कंचन बाई मेघवाल का घर है। वह आंगनबाड़ी केंद्र के पास स्थित हैंडपंप पर कपड़े धो रही थीं। उन्होंने जब बच्चों पर मधुमक्खियों का हमला होते देखा तो वह दरी और कंबल लेकर दौड़ीं और आनन-फानन में सारे बच्चों पर दरी और कंबल से घेरा बनाकर उन्हें सुरक्षित वहां से निकालकर दूर पहुंचाया। लेकिन इस दौरान उन्हें मधुमक्खियों ने जमकर काटा। बच्चों को बचाकर वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। इस बीच आसपास के ग्रामीण भी एकत्र हो गए। डायल 112 को बुलाकर घायल कंचन बाई को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। अंदाजा लगाईये कि अगर बच्चे मधुमक्खियों की चपेट में आ जाते तो कैसी अनहोनी हो जाती। कंचनबाई ने एन वक्त पर जिस तरह से बच्चों को बचाया है उसे मां की ममता और विकट स्थिति में संयम और साहस का परिचय ही कहा जाएगा। कंचनबाई ने कलयुग में ‘ दाधिची ’ की तरह समाज की सुरक्षा में अपने प्राण न्यौछावर किए हैं। खुसूर-फुसूर है कि इतना बडा त्याग करने वाली महिला को लेकर अब तक शासन एवं प्रशासन स्तर पर कोई बयान सामने नहीं आया है,जबकि अंगुली कटाने वालों को वजूद दिया जाता है यहां तो सच्चे मायने में बच्चों के लिए शहादत देने वाले को भी नजरअंदाज किया जा रहा है।देर से ही सही इस धाय मां को प्रदेश में वर्तमान दौर के मान से पूरा शहीदी सम्मान दिया जाना चाहिए।इससे दुसरों की जान बचाने की प्रेरणा को आधार मिलेगा।

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