उज्जैन। पूरे प्रदेश के साथ ही उज्जैन जिले में भी एकल नल जल योजनाएं निर्धारित डेडलाइन में पूरी नहीं हो पाई हैं। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग ने एकल नल जल योजनाओं का काम पूरा करने की समय सीमा 31 दिसंबर, 2025 निर्धारित की थी। काम पूरा नहीं होने से अब इसकी नई अवधि बढ़ाकर 31 मार्च, 2026 तय की गई है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक प्रदेश में एकल नल जल योजनाओं का काम 95 प्रतिशत पूरा हो गया है। फरवरी और मार्च में शेष 5 प्रतिशत काम पूरा करने की चुनौती लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सामने है।
पीएचई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उज्जैन संभाग के सभी 7 जिलों को हर घर जल प्रमाणित घोषित करने की तैयारियां पूरी हो गई हैं। इन जिलों में उज्जैन, देवास, रतलाम, आगर मालवा, शाजापुर, मंदसौर और नीमच शामिल हैं। सीएम डॉ. मोहन यादव की हरी झंडी मिलते ही इन जिलों को हर घर जल प्रमाणित जिला घोषित कर दिया जाएगा।
गौरतलब है कि देशभर में जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर तक व्यक्तिगत नल कनेक्शन पहुंचाने का लक्ष्य समय पर पूरा नहीं हो पाया है, जिसके कारण 2024 की मूल समय सीमा को बढ़ाकर अब दिसंबर 2028 कर दिया गया है। देश के कई राज्यों में ग्रामीण क्षेत्रों में नल लग गए हैं, लेकिन पानी की आपूर्ति अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिससे यह महत्वाकांक्षी योजना कई जगहों पर पिछड़ती दिख रही है। मप्र में जल जीवन मिशन के तहत 51 हजार से ज्यादा गांवों में नल से जल की सप्लाई की जानी है। इन गांवों में घरों की संख्या करीब एक करोड़ 12 लाख है। जल जीवन मिशन में दो तरह की योजनाओं (एकल नल जल और समूह नल जल) पर काम चल रहा है। प्रदेश में एकल नल जल योजनाओं की संख्या 28 हजार से ज्यादा है, जबकि समूह नल जल योजनाओं की कुल संख्या 147 है। समूह नल जल योजनाओं का करीब 67 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। जल स्त्रोत उपलब्ध नहीं होने के कारण समूह नल जल योजनाओं के काम में देरी हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूर्व में जल जीवन मिशन के काम में अलग-अलग तरह की बाधाएं सामने आ रही थीं। कहीं राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण काम प्रभावित हुआ, तो कहीं स्थानीय लोगों ने काम में रुकावट डाली। इसके अलावा कई स्थानों पर ठेकेदारों की लापरवाही से भी काम में देरी हुई। चीजों में सुधार करने के बाद काम की गति बढ़ गई है। पहले से ही समूह नल जल योजनाओं का काम पूरा करने की डेडलाइन मार्च, 2027 निर्धारित है। प्रदेश में जल जीवन मिशन पर 81 हजार करोड़ से ज्यादा राशि खर्च होगी।