खुसूर-फुसूर
अगर ये हो गया तो हमारा रास्ता और सफल होगा
हमारे शहर में मात्र 13 किलोमीटर दूर अगर औद्योगिक क्षेत्र के पास में हवाई अड्डा बन गया तो इस शहर की बल्ले – बल्ले होने से कोई नहीं रोक सकता है। बात यह नहीं है कि वहां से बहुत रोजगार मिल जाएगा। पूरे 40 साल का हिसाब पडोसी से चुकता हो जाएगा। हर बार धार्मिक नगरी के लिए आने वाली प्रगति को खाकर बैठा और अब भी हमारे कोल को बराबर खा रहा है। देवास रोड पर अगर हवाई अड्डा आ गया तो हमारे और पडोसी जिले के विकास के रास्ते अलग –अलग हो जाएंगे। अभी हमारे विकास का रास्ता उनके इधर से होकर जाता है जिसका काफी हिस्सा उनकी झोली में चला जाता है। हमारी निर्भरता उनपर ज्यादा है। यही कारण है कि शहरी विकास से लेकर अन्यानेक मामलों में हमें एक मात्र इंदौर रोड ही दिखाई देता है। यहां तक की प्रगति के शहर के रूप में भी पडोस में यही शहर दिखाई देता है। देवास रोड पर हवाई अड्डे के आ जाने से देवास मार्ग पर बूम होगा और उसके बाद बल्ले –बल्ले हो जाना तय है। अभी हमारे यहां आने वाले बडे श्रद्धालु इनके यहां होटलों में रात को रूकते हैं,उनके यहां से कार टैक्सी लेते हैं उज्जैन आते हैं बाबा के दर्शन करते हैं हम उनका सम्मान करते हैं और वे रवाना हो जाते हैं। उनके यहां की होटल वालों को मिला,टैक्सी वाले को मिला। शाप वालों को कुछ न कुछ मिलता है। उज्जैन वालों को क्या मिलता है- ठुल्लू। हमारे यहां हवाई अड्डा होगा। नाईट लैंडिंग होगी तो आने वाले श्रद्धालु उनके यहां नहीं हमारे यहां ही आएगा। रूकेगा। हवाई अड्डे के पास की होटलों में रात्रि विश्राम करेगा। आसपास के शाप से खरीदी करेगा। हवाई अड्डे की इस योजना को हर हाल में अमल में लाना चाहिए। स्मरण रखा जाए पडोसी का मेहमान पडोसी का ही होता है आपका नहीं। खुसूर-फुसूर है कि विकसित भारत 2047 के तहत देश में जो हवाई अड्डे बनने हैं उनमें उज्जैन को भी लाभ ले ही लेना चाहिए। 400 कुल होना हैं अभी मात्र 167 ही हैं ऐसे में देश के हवाई मार्ग में अगर हम शामिल हो गए तो हमारी प्रगति को नया सौपान मिल सकेगा। हमारा मार्ग पडोसी से अधिक निखर जाएगा। जैसे हम अभी उस पर निर्भर हैं वैसे ही पास के हमारे संभाग के तीन जिले हम पर निर्भर हो जाएंगे और वे भी प्रगति पथ पर तेजी से आगे बढने लगेंगे।