घर-घर जाकर मतदाताओं की मान-मनुहार में जुटे प्रत्याशी

बदनावर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जिला पंचायत व जनपद पंचायत सदस्य, ग्राम पंचायत सरपंच व पंच पदों के लिए किस्मत आजमा रहे प्रत्याशियों का चुनाव प्रचार जोर-शोर से जारी है। वे अपने पक्ष में समर्थन जुटाने के लिए गावों में घर-घर जाकर मतदाताओं की मान-मनुहार में जुुटे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के गली-मोहल्लों से लेकर चौक-चौराहों तक प्रचार की रौनक खूब दिखाई दे रही है। प्रत्याशियों ने चुनाव प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। अपनी जीत के गणित को साधने के लिए रूठों को मनाने व नये लोगों को साथ लाने जैसे प्रयास तेजी से किए जा रहे हैं। इसी होड़ में प्रत्याशी व उनके समर्थक गली-गली व घर-घर जाकर मतदाताओं से अपने पक्ष में समर्थन जुटाने में जुटे हैं। ऐसे में नजारा इतना रोचक है कि सुबह से शाम तक मतदाताओं की प्रत्याशी और उनके प्रतिनिधियों से भेंट हो रही हैं। कई जगह तो देर शाम भी चाय पर चुनाव की चर्चा करके प्रत्याशी अपने पक्ष में वोट मजबूत करने में जुटे हैं। उम्मीदवार और उनके प्रतिनिधि ढोल और साउंड सिस्टम साथ लेकर चल रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं का ध्यान आकर्षित किया जा सके। उम्मीदवारों के ये प्रयास मतदान तक कितने वोट में बदल पाएंगे ये महत्वपूर्ण है।
यहां बता दें कि लोकल चुनावों में मुकाबले भी नजदीकी होते हैं। ऐसे में एक-एक वोट कीमती हो जाता है। लोग परिचित प्रत्याशी को वोट करना पसंद भी करते हैं। इसी रणनीति के साथ कुछ उम्मीदवार और उनके परिवार के लोग भी मतदाताओं को लुभाने के लिए मतदाताओं के घरों तक पहुंचकर अपने पुराने संबंधों की दुहाई देने में पीछे नहीं हैं। शहर से गांवों तक और ड्यूटी पर साथ काम करने तक की नजदीकियां और रिश्तेदारियां भी निकाली जा रही है।
पंचायत चुनाव में पहले चरण के मतदान में अब आने वाले पांच दिन मतदाताओं के लिए निर्णायक होने वाले हैं। इन्हीं पांच दिनों के दौरान जो भी उम्मीदवार अपने चुनावी वायदों से मतदाताओं को लुभा पाएगा, वहीं जीत के करीब होगा। अंतिम दौर में पूरी ताकत झोंकनी होगी ये जानकर उम्मीदवार पूरी क्षमता से मैदान में आकर जीत पक्की करने में जुटे हैं। वहीं पार्टी समर्थित चुनाव लड़ने वालों के लिए दिग्गज नेता भी प्रचार में कूद गए हैं। गांव की चौपाल व नुक्कड़ पर सभाएं करके ग्राम विकास के दावे और बड़े-बड़े वादे किए जा रहे हैं। हालांकि लोकल चुनाव में बड़े नेताओं की मौजूदगी कितना प्रभाव डाल पाएगी, ये तो नतीजे बताएंगे। मगर प्रचार भी विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तर्ज पर हो रहा है। ऐसे में सभी उम्मीदवार एक-एक वोट की गिनती करके उसे खिसकने से बचाने में पूरी शक्ति लगा रहे हैं।

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