कार्तिक मेला आधा ही लगा, ऊपर से  व्यापारी अव्यवस्था  से परेशान हो रहे

– नगर निगम प्रशासन मेले की व्यवस्थाओं पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहा

– सारी व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही, दुकानदार परेशान

ब्रह्मास्त्र उज्जैन। शिप्रा किनारे लगा कार्तिक मेला एक तो आधा-अधूरा लगा है। और इसमें भी जो व्यापारी आए है वे गंदगी से लेकर मूलभुत समस्याओं से ही परेशान हो रहे हैं। व्यापारियों ने यहां तक कहा कि इससे तो बढ़िया होता कि वे मेले में आते ही नहीं। यहां आकर सिर्फ नुकसान ही उठाना पड़ रहा है।

इस बार देखा जाए तो कार्तिक मेला ठीक से लग ही नहीं पाया। उज्जैन में परंपरा अनुसार तो कार्तिक मेला कार्तिक मास की पूर्णिमा से ही शुरू हो जाता है। लेकिन इस बार पूर्णिमा पर तो कार्तिक मेला ग्राउंड पर कव्वे ही उड़ रहे थे। गधों का मेला जरूर शुरू हो गया था। कई दिनों तक यहीं असमंजस बना रहा कि कोरोना के चलते मेला लगेगा भी या नहीं। बाद में आदेश आए कि नियम व शर्तों का पानल करते हुए मेला लगाया जा सकता है।

निगम की आधी-अधूरी तैयारी  के बीच मेला, व्यापारी नहीं आए

निगम ने आधे-अधुरे तैयारियां शुरू की और दुकानें लगाई पर काफी देर होने से इस बार बाहर से व्यापारी ही नहीं आए। इसके चलते आधे से ज्यादा मेले में तो दुकानें खाली ही पड़ी है। और जहां मेला लगा है वहां दुकान लगाने वाले व्यापारी से लेकर मेला घूमने आने वाले लोग गंदगी से परेशान है। शिप्रा के छोटे पुल से मेले में प्रवेश करते ही गेट होता था। इस बार यहां कोई गेट नहीं है।

पहले तो ऐसा होता था मेला इस बार सब उल्टा-पुल्टा लगा

– मेले में अंदर जाने के बाद पहले मीना बाजार होता था फिर फोटो वाले, चूड़ी वाले आदि सामान की दुकानें आती थी।

– इसके आगे चलने पर कुछ छोटी खान-पान की दुकानें व बड़े-बड़े झूले होते थे।

– इसके बाद मंच आता और फिर अन्य दुकानों का बड़ा बाजार सजता था। लोग इसे चार राउंड में घूमकर देखते थे।

– इस बार तो समझ ही नहीं आ रहा कि मेला कहां कैसे लगाया गया है। सब कुछ उल्टा पुल्टा दिख रहा।

– प्रवेश करने के बाद कोई बाजार नहीं है। झूले भी इस बार ऊपर की तरफ लगा दिए गए।

– आगे की तरफ ही मंच बनाया गया है जो सुना पड़ा है। कुछ एक कार्यक्रम भी हो रही पर कोई देखने वाला ही नहीं आ रहा।

– कार्तिक मेले में इस बार वो रौनक ही नजर नहीं आ रही जो कार्तिक हमेशा होती है।

पूरे मेले में फैल रहा कचरा कोई साफ करने वाला ही नहीं

पूरा मेला परिसर कचरे से भरा पड़ा है। अब कौन ऐसे मेले को देखना चाहेगा। नगर निगम प्रशासन भी इस बार मेले में कोई रुचि नहीं ले रहा है। इसके चलते मेले की व्यवस्थाओं की ओर कोई जिम्मेदारी से ध्यान देने वाला ही नहीं है। जनप्रतिनिधि भी मेले में नहीं दिख रहे।

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