समीर वानखेड़े के वकील ने कहा: बिना पुख्ता सबूत के लगाया आरोप, पुलिस के दस्तावेज कैसे मलिक को मिल रहे हैं

ब्रह्मास्त्र मुंबई। एनसीबी के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े के पिता ज्ञानदेव वानखेड़े की ओर से महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नवाब मलिक के खिलाफ दायर 1.2 करोड़ के मानहानि केस में आज सुनवाई हुई। बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस माधव जामदार के चेंबर में हुई इस सुनवाई के दौरान मलिक द्वारा सबमिट नए डॉक्यूमनेट पर बहस हुई। मलिक ने समीर वानखेड़े के स्कूल का लिविंग सर्टिफिकेट अदालत के सामने पेश किया है। जिसमें उनके पिता का नाम ज्ञानदेव दाऊद वानखेड़े है।
मानहानि केस में अंतरिम राहत मांगते हुए वानखेड़े के पिता ने नवाब मलिक द्वारा लगातार लगाए जा रहे आरोपों पर रोक लगाने और उनके द्वारा किए जा रहे मानहानि वाले ट्वीट पर प्रतिबंध की मांग की है। इसी मामले की सुनवाई के दौरान ज्ञानदेव वानखेड़े के वकील ने कहा -13 नवंबर तारीख के बाद मलिक ने बीएमसी से समीर वानखेड़े के बर्थ सर्टिफिकेट के बारे में आरटीआई से जानकारी मांगी यानी ट्वीट करने के कई दिन बाद उन्होंने जानकारी मांगी। बिना पुख्ता जानकारी हासिल किए बगैर ट्वीट किया गया। इस आरटीआई में भी यही कहा गया है कि 1993 में समीर के पिता का नाम ज्ञानदेव करेक्ट किया गया है और करेक्ट करने वाले अफसर के बारे में भी लिखा गया है।

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