आखिर क्या “मीठा” है चौरसिया में..? जिसके लिए मंत्री मोहन यादव ने झूठ का सहारा लेकर अपना पीए बनवाया

ब्रह्मास्त्र उज्जैन। एक सहायक शिक्षक को अपना पीए बनाने के लिए उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव यदि झूठ का सहारा लेते हैं तो यह सवाल लोगों के जेहन में कौंध रहा है कि आखिर सहायक शिक्षक और अब पीए योगेश चौरसिया से मंत्री जी को क्या मीठा है ? क्यों चौरसिया को ही अपना पीए बनाना चाहते थे ? और झूठ का सहारा लेकर भी उन्हें अपना पीए बनाया। आखिर योगेश चौरसिया की ऐसी क्या विशेषता है, जिसके कारण एक मंत्री को कानून -कायदे तक दांव पर लगाना पड़े ?
गौरतलब है कि कांग्रेस ने कल बाकायदा एक पत्रकार वार्ता लेते हुए मंत्री मोहन यादव, उनके पीए योगेश चौरसिया तथा तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी व अन्य स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों के आधार पर अगर देखा जाए तो ऐसा लगता है जैसे कानून कायदा नाम की कोई चीज ही नहीं बची है।
गौरतलब है कि उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव पर अपने पद का दुरुपयोग कर शिक्षा विभाग को गलत जानकारी देते हुए सहायक शिक्षक योगेश चौरसिया को अपना पीए बनवा लेने का आरोप लगा है। इसके पहले भी योगेश चौरसिया अपने आपको उज्जैन दक्षिण के विधायक मोहन यादव का पीए बताते हुए 5 साल तक स्कूल से गायब रहे हैं।

सभी दोषियों पर कार्रवाई की मांग

जिला कांग्रेस अध्यक्ष ( ग्रामीण) ऋतुराज सिंह चौहान ने आरोप लगाते हुए इस मामले में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी, सहायक शिक्षक चौरसिया सहित सभी दोषियों पर कार्यवाही की मांग की है। गौरतलब है कि यह एक ऐसा मामला है जिसमें जिला शिक्षा अधिकारी ने कलेक्टर के आदेश को भी नहीं माना। जिला कांग्रेस नेता ने बताया कि उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने कूटरचित कर सहायक शिक्षक योगेश चौरसिया को अपना निज सहायक बनाया, जबकि पूर्व कार्यकाल में पीए नहीं होते हुए भी 5 साल तक स्कूल में नहीं पढ़ाया और बिना तारीख के लाखों रुपए की अनियमितता की है। उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव के वर्तमान पीए योगेश चौरसिया, सहायक शिक्षक माध्यमिक विद्यालय नीलगंगा उज्जैन का स्थानांतरण 9 मार्च 2019 को प्राथमिक विद्यालय जलोदिया कर दिया गया था। उक्त आदेश के परिपालन में कार्यमुक्त भी कर दिया गया था, परंतु मंत्री मोहन यादव ने अपने पद का दुरुपयोग कर विभाग को गलत जानकारी देकर योगेश चौरसिया माध्यमिक विद्यालय नीलगंगा उज्जैन का बताकर जुलाई 2019 में अपना पीए बनवा लिया। जबकि चौरसिया को जून 2019 में कार्य मुक्त कर दिया गया था।

मंत्री के पीए चौरसिया पर निकलती है 24 लाख की वसूली

गौरतलब है कि योगेश चौरसिया पूर्व में शासकीय प्राथमिक विद्यालय नीलगंगा उज्जैन में पदस्थ था। विधायक मोहन यादव का पीए नहीं होते हुए भी प्रतिदिन हस्ताक्षर कर विद्यालय से चला जाता था। प्रधानाध्यापक श्रीमती शकुंतला वर्मा द्वारा इस पर आपत्ति लेने पर उन्हें झूठे प्रकरण में फंसाने की धमकी देता था। नो वर्क नो पे के आधार पर यदि कार्यवाही हो तो चौरसिया पर करीबन 24 लाख रुपए की वसूली निकलती है।

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