बेरोजगारी से तंग सिविल इंजीनियर परिवार ने की आत्महत्या की कोशिश: भोपाल में पति और बेटी की मौत, पत्नी और बेटा कर रहा जीवन तथा मृत्यु से संघर्ष

ब्रह्मास्त्र भोपाल। बेरोजगारी और आर्थिक तंगी कितनी भयानक और क्रूर हो सकती है, इसका दिल दहला देने वाला उदाहरण भोपाल में देखने को मिला है। यह वह घटना है जिससे किसी भी शर्मदार सरकार का सिर शर्म से झुक जाना चाहिए। राजधानी में हुए इस सनसनीखेज मामले में अकेले भोपाल को ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश को हिला दिया है। आर्थिक तंगी से परेशान होकर एक पढ़े-लिखे सिविल इंजीनियर परिवार ने आत्महत्या की कोशिश की। परिवार के 2 लोगों की मौत भी हो गई , जबकि 2 सदस्य जीवन और मौत से संघर्ष कर रहे हैं। प्राथमिक तौर पर मिली जानकारी के अनुसार मामला मिसरोद थाना क्षेत्र के सहारा स्टेट का है। यहां पर रह रहा सिविल इंजीनियर लंबे समय से बेरोजगार था। आर्थिक तंगी से परेशान होकर अंततः इस परिवार ने मौत को गले लगा लिया। सिविल इंजीनियर और उसकी पत्नी ने जहर पी लिया, जबकि उन्होंने अपने 16 साल के बेटे और 14 साल की बेटी का ब्लेड से गला काट डाला। इस घटना में सिविल इंजीनियर और उसकी बेटी की मौत हो गई। उसकी पत्नी और बेटे को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। जहां वे जीवन और मृत्यु से संघर्ष कर रहे हैं। सरकार रोजगार देने के बड़े-बड़े वादे और दावे करती है। एक मजदूर को भी 365 दिनों में से 90 दिन रोजगार की गारंटी देती है, परंतु रोजगार है या नहीं इसकी पोल तो सिविल इंजीनियर परिवार की यह दास्तां है, जिसमें माता-पिता को अपने बच्चों का ही गला काटना पड़ा और खुद को भी जहर पीकर इस दुनिया से उठ जाने का फैसला करना पड़ा।

उज्जैन- इंदौर में भी आर्थिक तंगी व सूदखोरी से तंग आ लोगों ने की आत्महत्या

दरअसल, बेरोजगारी और आर्थिक तंगी का यह अकेला मामला नहीं है। उज्जैन में आर्थिक तंगी से परेशान होकर लोगों ने सूदखोरों से ब्याज पर रुपए लेना शुरू किया और नहीं चुका पाने के कारण आत्महत्या करनी पड़ी। उज्जैन में तो ऐसे भी उदाहरण सामने आए जिसमें पुलिस और नेताओं द्वारा सूदखोरों को संरक्षण देने के कारण उन्हें आत्महत्या के अलावा और कोई रास्ता नजर नहीं आया। कोरोना काल और उसके बाद आत्महत्या के कई मामले सामने आए हैं। इंदौर भी इससे अछूता नहीं है। यह कहें तो ज्यादा ठीक है कि प्रदेश में ऐसे कई मामले हुए हैं।

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