एक और घोटाले की आहट : उज्जैन दुग्ध संघ के सीईओ सिंह पर भी गड़बड़ी की आंच

दिल्ली भेजे गए दूध के लाखों रुपए गायब होने को लेकर उठ रहे सवाल

ब्रह्मास्त्र उज्जैन। 30 लाख रुपए के घी घोटाले में भले ही दो तत्कालीन वरिष्ठ अफसरों को निलंबित कर उज्जैन दुग्ध संघ में यह मामला अब खत्म हुआ जैसा समझ लिया गया हो, लेकिन इससे अलग भ्रष्टाचार के कुछ और किस्से भी कहे सुने जा रहे हैं। कुछ अन्य अधिकारियों पर भी इसकी आंच पड़ती नजर आ रही है। कहते हैं कि जब भ्रष्टाचार की फाइल खुलती है तो कई पुराने किस्से भी सामने आने लगते हैं। दबी जुबान से कई बातें चर्चा में सामने आ रही है। बात पुरानी है लेकिन चर्चाओं के दौर में शामिल है। कहा जा रहा है कि यह किस्सा उस वक्त का है जब वर्तमान मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री डी पी सिंह उज्जैन दुग्ध संघ में मार्केटिंग के मैनेजर के पद पर कार्य कर रहे थे। उसी दौरान दिल्ली एनसीआर में उज्जैन दुग्ध संघ से दूध एवं दुग्ध उत्पाद, सामग्री विक्रय करवाई गई थी। उस वक्त दिल्ली में डिस्ट्रीब्यूटर नियुक्त किया गया और उसे लगातार उज्जैन दुग्ध संघ से दुग्ध एवं दूध उत्पाद भेजा जाता रहा। नियमानुसार डिस्ट्रीब्यूटर से उज्जैन दुग्ध संघ को प्राप्त होने वाली राशि दुग्ध संघ उज्जैन के खाते में जमा होनी चाहिए थी, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह राशि बीच में ही कहीं गायब हो गई। यह राशि आखिर कहां गई? यह जांच का विषय है। उज्जैन दुग्ध संघ को दिल्ली एनसीआर डिस्ट्रीब्यूटर की तरफ आज दिनांक की स्थिति में भी लगभग 40 लाख रुपए लेना बाकी बताया जा रहा है, जिसकी जांच एमपीसीडीएफ भोपाल के स्तर से की जा रही थी। फिलहाल इस जांच का क्या हुआ यह भी जांच का विषय है।
बताया जा रहा है कि तत्कालीन समय में उज्जैन दुग्ध संघ में पदस्थ अधिकारी श्री वीके खरे के रिटायरमेंट के उपरांत मिलने वाले भुगतान को रोका गया है। इसकी वजह बताई जा रही है ताकि दिल्ली वाले घोटाले का ठीकरा बीके खरे के सिर पर फोड़ा जा सके और असल दोषी साफ निकल जाएं।
अभी भी दुग्ध संघ के कुछ अधिकारियों की तारीफ के पुल बांधे जा रहे हैं, ताकि मीडिया तथा अन्य लोगों का ध्यान और घोटालों पर न जाए जो पूर्व में हो चुके हैं।
सीईओ डी पी सिंह द्वारा सिक्योरिटी सर्विस के श्रमिकों को बाहर कर वाहवाही लूटी जा रही है ,जबकि उनके बारे में भी कहा जा रहा है कि उज्जैन दुग्ध संघ में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर रहकर उज्जैन दुग्ध संघ की कोई प्रगति नहीं हो पाई । इसी कड़ी में सिक्योरिटी सर्विस के श्रमिक, दुग्ध उत्पादक किसान , कर्मचारियों को आशंका है कि दुग्ध संघ भविष्य में कहीं गहरे आर्थिक संकट में डूबते हुए बंद न हो जाए। बताया जा रहा है कि पिछले वर्ष कोरोना काल के चलते हुए संघ को एवं दुग्ध उत्पादक किसानों को कई परेशानियों का सामना उठाना पड़ा एवं लाखों रुपए का घाटा भी हुआ था! उज्जैन दुग्ध संघ को डूबने से बचाने और दुग्ध संघ से जुड़े हुए 50000 किसान परिवार की आजीविका पर विपरीत असर ना पड़े और यह किसानों की संस्था किसानों के हित में निरंतर चलती रहे , जिससे कि सभी किसान वर्ग, दुग्ध उत्पादक एवं छोटे बड़े कर्मचारी गण दुग्ध संघ की प्रगति में कंधे से कंधा मिलाकर चल सकें। किसानों को अपने दूध का उचित मूल्य समय पर मिल सके। दुग्ध संघ की लगातार प्रगति हो।

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