कर्मचारियों की सतत हड़ताल से घिर गई शिवराज सरकार

आने वाले उपचुनाव पर पड़ सकता है असर

ब्रह्मास्त्र इंदौर। एक संयुक्त मोर्चा बनाकर 17 विभागों के कर्मचारी संगठनों ने पिछली 22 जुलाई से लगातार हड़ताल कर रखी है। इंदौर- उज्जैन सहित पूरे प्रदेश के हर जिले और तहसील स्तर पर इस हड़ताल का व्यापक असर दिखाई दे रहा है। ऐसा इसलिए ,क्योंकि सरकारी योजनाओं को प्रचारित और कार्यान्वित यही विभाग करते हैं। पंचायत कर्मी, रोजगार सहायक से लेकर ग्रामीण विकास विभाग से संबंधित ऐसे तमाम सरकारी महकमे है, जो पिछले 15 दिनों से लगातार हड़ताल पर होने के कारण कई लोगों के काम अटक गए हैं। जाहिर है जन असंतोष तो बढ़ना ही है। इनके अलावा पटवारी संघ भी कभी हड़ताल पर तो कभी सामूहिक अवकाश पर रहकर अपना असंतोष व्यक्त कर रहा है। तहसीलदार भी खुश नहीं हैं। शिक्षक संघों की अलग अपनी समस्याएं हैं। कुल मिलाकर इस वक्त प्रशासनिक महकमा असंतोष के ज्वर से पीड़ित हहै। ऐसे में सरकार लगातार अनदेखी कर रही है। सवाल यही है कि कहीं यह अनदेखी उसे मध्य प्रदेश में होने जा रहे खंडवा लोकसभा सीट तथा 3 विधानसभा सीटों पर होने जा रहे उपचुनाव में भारी न पड़ जाए। अलीराजपुर जिले की जोबट सहित तीन विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव तो ग्रामीण क्षेत्र ही हैं। खंडवा लोकसभा सीट में भी ग्रामीण क्षेत्र की बहुतायत है। हालांकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मुश्किल यह है कि खजाना खाली है। वह खुद कह चुके हैं कि सरकारी खजाने में उनके पास चवन्नी भी नहीं है। ऐसी स्थिति में कर्मचारियों की वेतन वृद्धि या अन्य भत्तों की मांग स्वीकार करना आसान नहीं है। इस मायने में अगर देखा जाए तो कर्मचारियों की सतत हड़ताल से शिवराज सरकार घिर गई है।

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