– किसानों की बल्ले-बल्ले : भाव आसमान पर होने से अन्नदाताओं को मिल रहे अच्छो दाम, मालवा का पीला सोना बना डालर

– विदेशों में सोया खली की अधिक मांग
मनोज भटनागर उज्जैन। पीला सोने के दाम आसमान पर होने से किसानोें की बल्ले-बल्ले हो रही है। इस वर्ष पीला सोने (सोयाबीन) के दाम जो किसानों को मिल रहे है वह आज तक इतने महंगें दामों पर नहीं बिका है। दो दिन पहले स्थानीय कृषि उपज मंडी में सोयाबीन के भाव 10 हजार रुपए क्विंटल से ऊपर पार हो गए है, जो अब तक सबसे ऊंचे दाम रहे है। इससे व्यापार जगत में खलबली मची हुई है। बुधवार को भी मंडी में सबसे अधिकतम दाम 9800 रहे।
अनाज तिलहन व्यवसायी संघ के सह सचिव राजेन्द्र राठौर ने बताया कि इस बार सोयाबीन की मांग विदेशों में मजबूत है और पैदावार कम हुई है। इस वजह से किसानों को मालवा का जो पीला सोना है उसके दाम अच्छे मिल रहे है। उन्होंने बताया कि उज्जैन की कृषि उपज मंडी संभाग की सबसे बड़ी मंडी है। यहां करोड़ों का व्यापार होता है। मंडी में सीजन के दिनों में प्रतिदिन करीब 700 ट्रॉलियां आती है। हालांकि अभी प्रतिदिन 200 के लगभग ट्रॉलियां किसान लेकर पहुंच रहे है। सोमवार को सोयाबीन अब तक के सबसे ऊंचे दाम 10 हजार रुपए क्विंटल बिका है, जो अपने आप में रिकार्ड है। बुधवार को 9800 रुपए क्विंटल के भाव बिका है। हालांकि यह तेजी करीब 10 दिन और बनी रहेगी। सह सचिव राठौर ने बताया कि व्यापारिक क्षेत्रों में भी कारोबारियों को सोयाबीन स्टॉक में काफी फायदा मिला है। इस वक्त जो उपज किसान मंडी में लेकर आते है वह अधिकतर बीज के लिए रखते है, जिससे इस समय उन्हें अच्छे दाम मिल रहे है। वायदा बाजार में 4 दिनों से जारी तेजी के चलते भाव में 2500 क्विंटल की तेजी आ गई है। व्यापारियों का कहना है कि यह करीब दस दिनों तक तेजी का बना रहेगी। हालांकि जबरदस्त तेजी के बाद कारोबारी व्यापार से हाथ खींचने लगे हैं। माना जा रहा है कि वर्तमान व्यापार सटोरियों के हाथों में है। ऐसे में कभी भी भारी मंदी का झटका आ सकता है। हालांकि वर्तमान में सोया खली की मांग विदेशी बाजार में काफी मजबूत बनी हुई है ऐसे में सोया प्लांट हर भाव में खरीदी कर रहे हैं। हालांकि इस बार जो सोयाबीन के दाम बढ़े है इस हिसाब से सीजन में पीले सोने के दाम करीब पांच से छह रुपए प्रति क्विंटल तक रहेंगे।
मालवा बेल्ट में सबसे अधिक सोयाबीन की पैदावार
मालवा बेल्ट में सबसे अधिक सोयाबीन की पैदावार होती है। मालवा क्षेत्र में 90 प्रतिशत किसान सोयाबीन की बोवनी करते है। इस बार भी उज्जैन जिले के किसानों ने करीब 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बोवनी की है और उत्पादन करीब साढ़े सात लाख मैट्रिक टन की संभावना है। हालांकि पिछले वर्ष 30 से 40 प्रतिशत कम हुआ था इसका मुख्य कारण यह था कि अतिवृष्टि के कारण सोयाबीन की फसल बर्बाद हो गई थी। उत्पादन कम हुआ था और डिमांड ज्यादा है।

– मलेशिया, अमेरिका और खाड़ी देशों में अधिक मांग
पीले सोने की सबसे अधिक मांग विदेशों में रहती है। यहां की मंडी से सोयाबीन की खली मलेशिया, अमेरिका, सऊदी अरब और खाड़ी देशों में सबसे अधिक जाता है। विदेशी बाजार में सोयाबीन की खली की डिमांड ज्यादा है। हमारे यहां पर जो सोयाबीन उससे खली बनती है उसकी डिमांड विदेशों में ज्यादा रहती है। इससे तेल 18 प्रतिशत निकलता है, जो कि हमारे देश के लिए बहुत कम है। ऐसे में हमें तेल को आयात करना पड़ता है। ऐसे में हम डीयोसी को निर्यात करते है। वर्तमान में विदेशी बाजार में काफी तेजी के कारण सोयाबीन के भाव सीजन से अभी तक दोगुना हो गए है। जबकि सीजन में सोयाबीन के दाम चार से साढ़े हजार रहते है। जबकि वर्तमान में यह दाम 10 हजार रुपए क्विंटल तक पहुंच गए है। हालांकि अधिकतर किसानों की सोयाबीन बिक चुकी है लेकि अभी भी प्रतिदिन 2 से तीन हजार बोरी सोयाबीन बिक रही है।

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