महाकाल में हादसा हो सकता था, प्रशासन ने भी मानी चुक

– कलेक्टर बोले – अगले सोमवार के लिए अभी से तैयारियां

– चाहे कुछ भी हो अब पहले जैसी भीड़ नहीं होने दी जाएगी

ब्रह्मास्त्र उज्जैन। महाकाल मंदिर में श्रावण मास के पहले सोमवार को उमड़ी श्रद्धालुओं की असीमित भीड़ ने कुछ देर के लिए जिला प्रशासन के अधिकारियों के भी पसीने छूटवा दिए थे। वीआईपी की आवभगत में लगे रहे अधिकारी भीड़ नियंत्रण ही भूल गए।

मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़। सभी भस्मारती गेट से अंदर जाने की जिद कर रहे थे और उन्हें गेट पर मौजूद गिनती के पुलिसवाले, सुरक्षा गार्ड और कुछ कर्मचारी रोकने का प्रयास कर रहे थे लेकिन लोग अव्यवस्था से भड़क गए और पूरी की पूरी भीड़ बेरिकेड्स हटाकर अंदर प्रवेश के लिए टूट पड़ी। यह तो गनीमत रही कि भीड़ में कोई दबा नहीं अन्यता क्षणभर में ही वहां हादसा हो जाता। दरअसल मंदिर समिति ने प्री-बुकिंग के जरिए अनुमति वाले गिनती के लोगों के प्रवेश की व्यवस्था कर रखी थी। जबकि लोग हजारों की संख्या में आ गए। ऐसे में वे अंदर जाकर दर्शन की जिद करने लगे। प्रशासन के लोग उन्हें रोक रहे थे। इससे श्रद्धालु नाराज हो गए कि वीआईपी तो बेधड़क जा रहे और उन्हें रोक रहे। बस इससे भीड़ बेकाबू हो गई। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने भी माना कि कही न कही चुक हुई है। खुद कलेक्टर आशीष सिंह ने भी पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अगले सोमवार के लिए अभी से तैयारी कर रहे हैं। बिल्कुल भी भीड़ नहीं होने दी जाएगी।

महाकाल में धक्का-मुक्की से पुलिस प्रशासन सकते में, एडीजी ने ली बैठक

महाकाल मंदिर में श्रावण मास के पहले दिन दर्शन के दौरान आम श्रद्धालुओं के बीच हुई धक्का-मुक्की व अव्यवस्थाओं को लेकर पुलिस प्रशासन भी सकते हैं। मंगलवार को शहर के प्रमुख अखबारों में प्रशासन की अव्यवस्थाओं की खबरें छपने के बाद खुद एडीजी योगेश देशमुख ने अधिनस्त अधिकारियों की बैठक ली व व्यवस्था संबंधी चर्चा की। एडीजी ने यह भी पूछा कि आखिर चूक कहां पर हुई है। आगे से ऐसा न हो इसके भी इंतजाम किए जाए। अधिकारी दिनभर इस पर मंथन करते रहे और कैसे व्यवस्था कर सुलभ दर्शन कराए जाए इस पर विचार करते रहे।

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