कोरोना से मौत के आंकड़े छुपाना गंभीर गुनाह : दोषियों को मिले सजा-ए-मौत

उज्जैन में दूसरी लहर का असह्य दर्द और गुस्सा पीड़ितों की जुबां से फूटा

“व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव आया, कोरोना सेंटर में ही उसका इलाज भी हुआ, रेमेडीसिविर इंजेक्शन, आक्सीजन से लेकर तमाम दवाइयों तक परिजनों की दौड़ लगवाई, मकान – दुकान बेच कर लाखों रुपए फूंक दिया, मौत भी कोरोना अस्पताल में ही हुई, फिर भी मौत का कारण कुछ और… जिंदगी के साथ ही मौत से खिलवाड़ करने वाले दोषियों किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाना चाहिए”

उज्जैन। यह बात अब सामने आ चुकी है कि कोरोना काल की दूसरी लहर में लोगों की मौत लगातार कोरोना से हो रही थी, लेकिन प्रशासन हर दिन आंकड़े छुपा रहा था। सिर्फ कागजों पर ही आंकड़े नहीं छुपाए जा रहे थे, बल्कि आमजन के साथ खुलेआम धोखा भी हो रहा था। यह भी राजफाश हो गया है कि मौत कोरोना से ही थी , लेकिन उसे दर्शाया नहीं जा रहा था। कई- कई बार तो कोरोना की मौत को निमोनिया, हार्ट फेल या कोई और कारण बता दिया गया। दैनिक अवंतिका ने भी इस बात का खुलासा किया था कि नगर निगम द्वारा जो मृत्यु प्रमाण पत्र दिया जा रहा था, उसमें मृत्यु का कारण ही नहीं दर्शाया गया। यहां तक कि मृत्यु के कारण का कॉलम तक फॉर्म में मौजूद नहीं है। कोरोना एक महामारी है। उसके कहर ने जो लोगों को परेशान किया है, उनकी जिंदगी जो छीनी है, वह तो है ही, लेकिन सरकारी स्तर पर भी यह खेल कम नहीं हुआ। लोगों का मानना है कि अब तो यह जानना जरूरी है कि लोगों की जिंदगी से जानलेवा खेल आखिर किस – किस ने खेला। जांच होनी चाहिए कि किन-किन लोगों ने कोरोना से मौत के आंकड़े छुपाए? जो भी दोषी हैं उन सभी के खिलाफ एफ आई आर दर्ज होनी चाहिए। इतना ही नहीं बल्कि लोगों की मौत से खिलवाड़ करने वाले इन गुनहगारों को सजा-ए-मौत मिलना चाहिए। एक भी गुनहगार छूटना नहीं चाहिए। ऊपर से लेकर नीचे तक सारे जिम्मेदारों की जांच होनी चाहिए और उनकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। इनमें सिर्फ प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी ही नहीं बल्कि सत्ता से जुड़े हुए नेता भी हैं जिन पर सरकार ने व्यवस्था करने और उसकी देखरेख की जिम्मेदारी डाली थी। जो गैर जिम्मेदाराना हरकत करते हुए उज्जैन को मुसीबत में छोड़कर चुनाव के बहाने भाग खड़े हुए थे। ऊपर से लेकर नीचे तक कोई भी बचना नहीं चाहिए। फिर वह कितने ही छोटे पद पर हो या कितना ही बड़ा। लोग सवाल कर रहे हैं कि कोरोना जैसी विपदा के समय आखिर किसने इनको अधिकार दिया कि यह लोगों की मौत से खेलें ? लोगों की जिंदगी बचाना इनका काम था न कि लोगों से उनका संवैधानिक ,नैतिक और मानसिक हक छीनना। कोरोना से मौत के आंकड़े छुपाना, मौत के कारण में हेराफेरी करना गंभीर गुनाह है। ऐसे कितने ही उदाहरण है जिसमें व्यक्ति को कोरोना पाज़िटिव होने के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया। रेमडीसिविर इंजेक्शन तथा अन्य दवाओं के लिए उनके परिजनों को इधर से उधर भटकाया गया।पूरा इलाज कोविड-19 का चला। कोविड-19 में ही भर्ती भी किया गया और मौत भी कोविड अस्पताल में ही हुई। मौत के बाद कारण बदल दिए गए। पॉजिटिव से नेगेटिव बता दिया गया ,परंतु लाश घरवालों के हाथ में नहीं सौंपी गई। कोरोना गाइडलाइन से ही उनका अंतिम संस्कार भी हुआ। कोरोना से मौत के सरकारी आंकड़े में उनका कहीं कोई जिक्र नहीं है। लोगों का कहना है कि अब समय आ गया है जब इन सब जिम्मेदारों पर केस हो और इस जघन्य अपराध के लिए उन्हें भी सजा-ए-मौत मिले। जिन लोगों ने अपने परिजनों को खोया है, जिन बच्चों के सिर से माता पिता का साया उठ गया, जिस मां ने अपने आंचल के लाल को खोया, कहीं-कहीं तो पूरा का पूरा परिवार ही मौत के आगोश में चला गया। जिन लोगों ने अपने परिजनों को बचाने के लिए रेमडीसिविर इंजेक्शन, ऑक्सीजन से लेकर 1-1 दवा तक के लिए लोगों के हाथ पैर जोड़े, दुकान- मकान तक बेचकर या गिरवी रख कर अपने परिजनों की जान बचाने के लिए लाखों रुपए फूंक दिए, और फिर भी वे नहीं बचे। कोरोना पॉजिटिव होने के कारण जिनका चेहरा तक देखना नसीब नहीं हुआ। ऐसे लोगों की मौत का कारण कुछ और बताया गया। मृतकों के परिजन आज बद्दुआ दे रहे हैं। मौत के आंकड़े छुपाए गए, यह बात सामने आने के बाद वह कोस रहे हैं सत्ता से जुड़े नेताओं और उन अधिकारियों को जिनके सिर पर लोगों की जान बचाने की जिम्मेदारी थी। ऐसे समय में वे लोगों की जान बचाने की बजाय उनकी मौत के आंकड़े से खिलवाड़ कर रहे थे। अब इन लोगों का कहना है कि ऐसे दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाना चाहिए। हमारे मृतक परिजनों की आत्मा को तभी शांति मिलेगी , जब वह दोषी भी फांसी के फंदे पर लटके। इन्हें भी तो पता चले कि तड़प- तड़प कर मरे लोगों का दर्द आखिर होता क्या है? आपसी चर्चा में लोग कह रहे हैं कि यदि सरकार सच्ची है , यदि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान वाकई जनहित की सोच रहे हैं तो उन्हें एक बार इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच करवानी चाहिए। जांच में दोषियों पर बगैर किसी भेदभाव के केस दर्ज करवाना चाहिए ,ताकि भविष्य में कभी भी लाशों के ढेर पर यह जिम्मेदार नंगा – बेशर्मी नाच न कर सके।

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